नईदिल्ली, एनसीईआरटी किताब विवाद मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को विवादित चैप्टर की समीक्षा कर रही विशेषज्ञ समिति के सदस्यों की जानकारी दी है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने देश के सर्वोच्च न्यायलय को बताया कि वरिष्ठ वकील और पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा और राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के निदेशक समिति के सदस्य होंगे। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अनिरुद्ध बोस भी विशेषज्ञ समिति के सदस्य होंगे।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अध्याय को फिर से लिखे जाने के संबंध में एनसीईआरटी के रुख पर चिंता जताई थी। कोर्ट ने एनसीईआरटी के निदेशक द्वारा दाखिल हलफनामे का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि संशोधित अध्याय आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में शामिल किया जाएगा और लागू पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचे के अनुसार विद्यालयों में कक्षा में पठन-पाठन के लिए इसका इस्तेमाल किया जाएगा। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा था, हम एनसीईआरटी के निदेशक द्वारा हलफनामे के पैरा 15 में व्यक्त किए गए रुख से भी उतने ही चिंतित हैं।
पीठ ने कहा था, हम निर्देश देते हैं कि यदि विषय की पाठ्यपुस्तक के अध्याय 4 को किसी भी प्रकार से फिर से लिखा गया है, तो उसे तब तक प्रकाशित नहीं किया जाएगा जब तक कि उसे संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों वाली एक समिति द्वारा अनुमोदित नहीं किया जाता है।
बता दें कि हाल में ही सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी किताब विवाद मामले में केंद्र सरकार को डोमेन एक्स्पर्ट कमेटी के गठन का आदेश दिया था। मुख्य न्यायाधीश ने कहा था, एक सप्ताह के भीतर डोमेन विशेषज्ञों की एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए और कानूनी अध्ययन पर सामग्री तैयार करने के लिए नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी, भोपाल से भी परामर्श लिया जाए।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने विवादास्पद कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक अध्याय में उनकी भूमिका के बाद प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, शिक्षक सुपर्णा दिवाकर और कानूनी शोधकर्ता आलोक प्रसन्ना कुमार को स्कूल पाठ्यक्रम तैयार करने में किसी भी भूमिका से बाहर करने का आदेश केंद्र और एनसीईआरटी को दिया था।