गौरैया संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की जरूरत

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श्रीनगर गढ़वाल : राजकीय इंटर कॉलेज मंजाकोट-चौरास में गुरुवार को विश्व गौरैया दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर डॉ. अशोक कुमार बडोनी ने कहा कि कभी हर आंगन और खेतों में चहचहाने वाली गौरैया अब धीरे-धीरे हमारी आंखों से ओझल होती जा रही है। कहा कि आधुनिक जीवनशैली, शहरीकरण और पारिस्थितिक असंतुलन इस छोटे पक्षी के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। कहा कि गौरैया केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि यह पर्यावरणीय संतुलन की सूचक है। कहा कि अगर हमने इसे बचाने के प्रयास नहीं किए, तो आने वाले वर्षों में यह हमारी प्रकृति से पूरी तरह लुप्त हो जाएगी। हमें अपने घरों, बगीचों और सार्वजनिक स्थलों पर घोसलों की व्यवस्था करनी होगी और इसे दाना-पानी उपलब्ध कराना होगा। कहा कि गौरैया संरक्षण केवल एक पहल नहीं, बल्कि इसे एक जन आंदोलन बनाने की जरूरत है। जब तक हर व्यक्ति इस अभियान से नहीं जुड़ेगा, तब तक इस नन्हें पक्षी को बचाना मुश्किल होगा। विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रमोद तिवाड़ी ने कहा कि गौरैया का घटता अस्तित्व हमें चेतावनी देता है कि हम अपने पर्यावरण के साथ किस तरह का व्यवहार कर रहे हैं। जैव विविधता की रक्षा के लिए हमें अभी से प्रयास करने होंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस सुंदर पक्षी को देख सकें। इस दौरान चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें छात्रों ने रंगों के माध्यम से गौरैया संरक्षण का संदेश दिया। प्रतिभागियों ने अपने चित्रों में गौरैया के घटते आवास, पेड़ों की कटाई, मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडिएशन और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को उकेरा। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर भूगोल प्रवक्ता मदन मोहन रावत, वीरेंद्र सिंह भंडारी, योगेश बहुगुणा, मनोज उनियाल, मनोज कुमार, धीरेंद्र भंडारी, मनीष चमोली, देवेंद्र रमोला, संगीता भंडारी, पुष्पा चौहान, किरन घिल्डियाल और भूपेंद्र बंगारी आदि मौजूद थे। (एजेंसी)

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