लखनऊ, ,। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सहकारिता आपसी विश्वास, सामाजिक समता और आत्मनिर्भरता की गारंटी है। सहकारिता के माध्यम से विकसित भारत की संकल्पना को साकार करना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है। उन्होंने युवाओं को इस आंदोलन के भविष्य का शिल्पी बताते हुए कहा कि उन्हें इस दिशा में खुद को तैयार करना होगा। यह ‘युवा सहकार सम्मेलन-2025Ó और ‘यूपी कोऑपरेटिव एक्सपोÓ प्रदेश की समृद्धि और सामूहिक विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।मुख्यमंत्री ने सहकारिता क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया और विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रतीकात्मक चेक एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर सहकारिता विभाग की पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय का गठन समाज की सहभागिता से समृद्धि का नया सोपान स्थापित करने के लिए किया गया। अमित शाह इस मंत्रालय के पहले मंत्री के रूप में सहकारिता आंदोलन को नई ऊँचाई दे रहे हैं। वर्ष 2025 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया है। राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 का लक्ष्य प्रधानमंत्री के ‘सहकार से समृद्धिÓ विजन के माध्यम से वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है। भारत में लगभग 8.44 लाख सहकारी समितियां हैं, जिनमें 30 करोड़ से अधिक सदस्य सामूहिक शक्ति के रूप में योगदान दे रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में डिजिटलीकरण, ई-गवर्नेंस और पारदर्शी नीतियों के माध्यम से सहकारिता क्षेत्र में सुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित की गई है। एम-पैक्स के माध्यम से सदस्यता विस्तार और सहकारी बैंकों के आधुनिकीकरण ने सहकारिता आंदोलन को और मजबूत बनाया है। प्रदेश में सहकारिता वर्ष 2025 पर बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। 26 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष का शुभारंभ हुआ और ‘रन फॉर कोऑपरेशनÓ में हजारों लोगों ने भाग लिया।मुख्यमंत्री ने बताया कि 21 मार्च को यूपी स्टेट कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की वार्षिक साधारण सभा में स्टेकहोल्डर्स को 76 करोड़ रुपये का लाभांश ऑनलाइन वितरित किया गया। 6 जुलाई को केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के चौथे स्थापना दिवस पर 266 ड्रोन दीदियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। 12 सितंबर से 30 नवंबर तक एम-पैक्स सदस्यता महाअभियान-2025 में 24 लाख नए सदस्य बने और 43 करोड़ रुपये का शेयर कैपिटल प्राप्त हुआ। जिला सहकारी बैंकों में अब 2 लाख से अधिक बैंक अकाउंट और 550 करोड़ रुपये का डिपॉजिट है।मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेश के कोऑपरेटिव बैंक डिफॉल्टर और बीमार नहीं हैं, बल्कि स्वस्थ होकर अपने सदस्यों और किसानों की समृद्धि में योगदान दे रहे हैं। 6,760 एम-पैक्स को उर्वरक व्यवसाय के लिए 10 लाख रुपये ब्याज मुक्त ऋण की सीमा दी गई है, जिसे भविष्य में 15 लाख रुपये तक बढ़ाया जाएगा। एम-पैक्स ने 6,400 करोड़ रुपये का व्यवसाय किया और 191 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया। 161 एम-पैक्स ने जन औषधि केंद्रों के माध्यम से 1.86 करोड़ रुपये का व्यवसाय किया।मुख्यमंत्री ने भंडारण, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में कोऑपरेटिव सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि कोटवा पांडेय एम-पैक्स में 1,500 मीट्रिक टन क्षमता का गोदाम बनाया गया। 502 एम-पैक्स में सोलर रूफटॉप विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण हुआ और पुराने जर्जर गोदामों के लिए 70 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई। वर्ष 2025-26 में 30 करोड़ रुपये अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जाएगी। नवगठित 800 से अधिक एम-पैक्स को 1 लाख रुपये की मार्जिन मनी और आधारभूत संरचनाओं के लिए सहायता मिलेगी।मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव बैंक की ‘एÓ श्रेणी रेटिंग, 40 शाखाओं का संचालन और 49 जिला सहकारी बैंकों के लाभ में कार्यरत होने का जिक्र किया। उन्होंने ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन कोऑपरेटिव बैंकÓ की योजना का भी परिचय दिया और बलरामपुर में नए जिला बैंक के गठन की प्रक्रिया जारी होने की जानकारी दी।मुख्यमंत्री ने कहा कि लघु और सीमांत किसानों को यूपी सहकारी ग्राम विकास बैंकों के माध्यम से मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत 6 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें राज्य सरकार अपना योगदान देगी। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु, सहकारिता राज्यमंत्री जे.पी.एस. राठौर, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।