नई दिल्ली, । जब जनरेटिव एआई ने पहली बार वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया, तब क्रिप्टो जगत की प्रतिक्रिया काफी सतही और अनुमानित थी। उपयोगिता पर ध्यान देने के बजाय बड़ी संख्या में “एआई टोकन” केवल ट्रेंड और कथानक की लहर पर सवार दिखाई दिए। लेकिन 2026 की शुरुआत तक यह दौर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा है। अब इसकी जगह एक अधिक गंभीर और दिलचस्प दिशा उभर रही है। एआई और क्रिप्टो का वास्तविक मेल बड़े भाषा मॉडलों को ब्लॉकचेन पर रखने का प्रश्न नहीं है। असल मुद्दा यह है कि ब्लॉकचेन नेटवर्क को एक साझा भरोसेमंद आधारभूत ढांचे के रूप में इस्तेमाल किया जाए—ऐसा ढांचा जो एआई आधारित अर्थव्यवस्था में गतिविधियों की पुष्टि कर सके, प्रोत्साहनों में संतुलन बना सके, डिजिटल संसाधनों का मूल्य निर्धारित कर सके और ऐसे प्रतिभागियों के बीच भी ऑडिट योग्य रिकॉर्ड बनाए रख सके जो एक-दूसरे को न जानते हों और न ही एक-दूसरे पर भरोसा करते हों। यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एआई और ब्लॉकचेन मूल रूप से अलग-अलग समस्याओं को हल करने के लिए बनाए गए हैं। एआई बेहद शक्तिशाली है, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली को समझना अक्सर आसान नहीं होता। यह निर्णयों को स्वचालित कर सकता है, सामग्री तैयार कर सकता है और बड़े पैमाने पर कार्यप्रवाहों का समन्वय कर सकता है। इसके बावजूद पारदर्शिता, संभावित दुरुपयोग और जवाबदेही से जुड़े सवाल अब भी बने हुए हैं। इसके विपरीत, सार्वजनिक ब्लॉकचेन अपेक्षाकृत धीमे और सीमित होते हैं, लेकिन वे उन कामों में सक्षम हैं जिनमें एआई नहीं—जैसे सत्यापन, नियमों का पारदर्शी अनुपालन और अविश्वास की स्थिति में भी साझा डेटा की विश्वसनीयता बनाए रखना। इसलिए इन दोनों तकनीकों का उभरता मेल किसी दार्शनिक विचार से अधिक व्यावहारिक आवश्यकता बनकर सामने आ रहा है। एआई बुद्धिमत्ता और स्वचालन की क्षमता प्रदान करता है, जबकि क्रिप्टो ऑडिट योग्यता, निष्पादन की संरचना, पहचान नियंत्रण और मशीन द्वारा सत्यापित किए जा सकने वाले भरोसे की व्यवस्था उपलब्ध कराता है। दोनों मिलकर उन समस्याओं का समाधान करने की क्षमता रखते हैं जिन्हें अकेले हल करना कठिन है। भारत के लिए वास्तविक अवसर यहीं है। एआई और क्रिप्टो का भविष्य केवल नए टोकनों के लॉन्च या विकेंद्रीकरण के बड़े वादों से तय नहीं होगा। यह इस बात से तय होगा कि डिजिटल प्रणालियों पर कितना भरोसा किया जा सकता है। भारत को ऐसी क्रिप्टो नवाचार नीति को बढ़ावा देना चाहिए जो उसके व्यापक तकनीकी लक्ष्यों के अनुरूप हो—डिज़ाइन से ही गोपनीयता की सुरक्षा, ऑडिट योग्य स्वचालन, मजबूत केवाईसी व्यवस्था और ऐसा बुनियादी ढांचा जो जिम्मेदार एआई के विकास का समर्थन करे। इस दृष्टिकोण में ब्लॉकचेन नीति का प्रतिद्वंद्वी नहीं है; वह भरोसे की वही परत बन सकता है जो भारत को एक जवाबदेह एजेंट अर्थव्यवस्था के निर्माण में सहायक हो।
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