अधर में रैन बसेरा, प्रेक्षागृह बना सहारा

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नगर निगम की ओर से बेसहारा लोगों के लिए प्रेक्षागृह में की गई है व्यवस्था
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : लगातार बढ़ रही ठंड आमजन को परेशान कर रही है। ऐसे में सबसे अधिक परेशानी बेसहारा लोगों को हो रही है। ऐसे में इन लोगों को सहारा देने के लिए इस बार भी बद्रीनाथ मार्ग स्थित प्रेक्षागृह ही सहारा बनेगा। दअरसल, नगर निगम की ओर से गाड़ीघाट में बनाया जा रहा रैन बसेरा अधर में लटका हुआ है।
कोटद्वार नगर निगम में अभी तक बेघर लोगों के लिए रैन बसेरे की व्यवस्था नहीं है। नगर निगम ने मालगोदाम तिराहे पर मौजूद कांजी हाउस को तुड़वाकर 2019 में रैन बसेरा निर्माण कार्य शुरू किया। शासन ने रैन बसेरा निर्माण को 98.45 लाख की धनराशि स्वीकृत करते हुए चालीस लाख रुपये अवमुक्त कर दिए। निगम ने निर्माण कार्य शुरू किया व रैन बसेरे का तीन मंजिला ढांचा खड़ा हो गया। इससे पहले रैन बसेरे में अन्य कार्य होते, रेलवे ने उक्त भूमि को स्वयं का बताते हुए निर्माण कार्य रूकवा दिया। ऐसे में नगर निगम के पास सर्दियों के मौसम में बेघरों को रात्रि विश्राम के लिए छत की व्यवस्था करना चुनौती बन गया। हालांकि, नगर निगम में दो-तीन वर्ष हिंदू पंचायती धर्मशाला में बड़े हाल में बेघरों के रूकने की व्यवस्था की। लेकिन, पिछले दो वर्षों से निगम प्रशासन प्रेक्षागृह के खाली कक्षों को रैन बसेरे के रूप में प्रयोग में ला रहा है। नगर आयुक्त पीएल शाह ने बताया कि प्रेक्षागृह में बेघरों के रात्रि विश्राम के लिए व्यवस्था कर दी गई है। बताया कि यदि जरूरत पड़ी तो अन्य स्थानों में भी अस्थाई रैन बसेरे की व्यवस्था की जाएगी।

रेलवे ने रोकी है रैन बसेरे की राह
वर्ष 2019 में नगर निगम ने मालगोदाम तिराहे के समीप खंडहर हो चुके कांजी हाउस को रैन बसेरे में तब्दील करने की कवायद शुरु की। लेकिन, 2021 में रेलवे ने उक्त भूमि को स्वयं को बताते हुए निर्माण कार्य रोक दिया। इस रैन बसेरा के भूतल पर किचन व दिव्यांगों के रहने की व्यवस्था होनी थी। जबकि, प्रथम तल पर महिलाओं, द्वितीय और तृतीय तल पर पुरुषों के रहने की व्यवस्था के साथ ही शौचालय और स्नानघर बनाया जाना था। हालांकि, नगर निगम की ओर से पुराने दस्तावेजों की ढूंढ कर भूमि को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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