टाकें लगाने तक का धागा नहीं पौडी जिला अस्पताल में

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पौड़ी। यदि दुर्भाग्यवश आप को या आपके बच्चे को चोट लग गई और आप उपचार के लिए जिला चिकित्सालय जा रहे तो टांके लगाने का धागा साथ ले जाएं। नहीं तो आपको 30 किमी दूर श्रीनगर से धागा खरीद कर जिला अस्पताल को देना होगा। तब जाकर ही जिला चिकित्सालय में टांके लग पाएंगे। जिला चिकित्सालय में टांके लगाने के धागे तक उपलब्घ्ध नहीं हैं। यह उस जनपद के जिला चिकित्सालय की स्थिति है,जिस जनपद ने उत्घ्तराखंड के साथ ही उत्तर प्रदेश को भी मुख्यम्ांत्रंी दिए हैं।
घटना गुरूवार की है। जनपद मुख्यालय पौडी के समीप गड़ोली गांव निवासी राकेश सिंह की 3 वर्षीय बेटी रिषिका घर में खेलते समय गिर गई और उसका ओंठ कट गया। परिजन बच्ची को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय लाए। लेकिन यहां चिकित्सकों ने बताया किअस्पताल में टांके लगाने वाला धागा नहीं है।
परिजनों के साथ पहुंचे कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष विनोद दनोशी ने बताया कि जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों ने टांके लगाने से यह कह कर इंकार कर दिया कि असपताल में टांके लगाने का धागा नहीं है। जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों ने परिजनों को टांके लगाने के लिए श्रीनगर जाने को कहा। परिजन जब बेटी को लेकर श्रीनगर उप जिला चिकित्सालय पहुंचे तो यहां पता चला कि चिकित्सालय के सर्जन कोरोना संक्रमित होने के कारण होम आइशोलेट हैं। जिस पर परिजन श्रीनगर से धागा खरीदकर लाए। जिला चिकित्सालय केचिकित्सकों को धागा देने के बाद बच्ची को टांके लग पाए। जिला चिकित्सालय के ईएमओ मुकेश भट्ट ने बताया कि बच्चों पर लगने वाले टांंके का धागा उपलब्ध नहीं था। इसलिए बच्ची को टांके लगाए जाने के लिए श्रीनगर भेजा गया। वहां सर्जन उपलब्ध न होने के कारण परिजन श्रीनगर से धागा लेकर आए। तब टांके लगाए गए। वहीं अस्पताल के चिकित्साधीक्षक डा0 गौरव रतूडी ने कहा कि अस्पताल में धागा उपलब्ध था। लेकिन बच्ची के परिजन प्लास्टिक सर्जरी वाला धागे से टांका लगवाना चाह रहे थे, जो उपलब्ध नहीं था।
बेहतर सुविधाओं के नाम पर पीपीपी मोड पर दिया है जिला चिकित्सालय जनपद के जिला चिकित्सालय को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के नाम पर पीपीपी मोड पर दिया गया है। अस्पताल का संचालन इंद्रेश अस्पताल देहरादून की ओर से कया जाताहै। पीपीपी मोड पर जाने के बाद से यहां स्थतियां बेहतर होने के बजाय और खराब होती जा रही हैं।

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