नई दिल्ली , सेना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर आसीन नेताओं ने भारतीय सेना के शौर्य, अनुशासन और बलिदान को सलाम किया। इस मौके पर हर नेता के संदेश का स्पष्ट फोकस सेना की निस्वार्थ सेवा, राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण और सर्वोच्च बलिदान पर रहा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी : निस्वार्थ सेवा और अटूट संकल्प का प्रतीक
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीय सेना निस्वार्थ सेवा की मिसाल है, जो सबसे कठिन हालात में भी दृढ़ संकल्प के साथ देश की रक्षा करती है। उन्होंने सैनिकों के कर्तव्यबोध को देशवासियों में विश्वास और कृतज्ञता जगाने वाला बताया और कर्तव्य पथ पर शहीद हुए वीरों को नमन किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू :एकता, संप्रभुता और मानवता की रक्षक
राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सेना देश की एकता, संप्रभुता और अखंडता की रक्षा में हमेशा अग्रिम पंक्ति में रही है। उन्होंने सीमाओं के साथ-साथ आपदा, संकट और मानवीय सहायता में सेना की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह : वैश्विक सम्मान और आधुनिक सेना का संकल्प
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सेना ने अपने पेशेवर कौशल, अनुशासन और मानवीय सेवा से वैश्विक सम्मान अर्जित किया है। उन्होंने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई कि एक आधुनिक, आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार सेना का निर्माण किया जा रहा है।
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन : साहस, अनुशासन और सर्वोच्च बलिदान
उपराष्ट्रपति ने सेना के अधिकारियों, जवानों और पूर्व सैनिकों को नमन करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा में उनका साहस और बलिदान हर नागरिक को प्रेरणा देता है। उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
गृह मंत्री अमित शाह : इतिहास में दर्ज शौर्य की गूंज
गृह मंत्री ने कहा कि भारतीय सेना का शौर्य इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज है, जो हर पीढ़ी के भारतीयों में देशभक्ति की भावना को प्रज्वलित करता है। उन्होंने राष्ट्र के लिए सर्वस्व अर्पित करने वाले वीरों को नमन किया।
क्यों मनाया जाता है सेना दिवस
हर वर्ष 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1949 में फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा के भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बनने की ऐतिहासिक घटना की स्मृति में मनाया जाता है।
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