जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार। राजकीय कर्मचारी घोषित करने और मानदेय बढ़ाए जाने सहित 12 सूत्रीय मांगों को लेकर की मांग को लेकर 27वें दिन भी आशाओं का प्रदर्शन जारी रहा। आशा कार्यकत्रियों का कहना है कि वे लंबे समय से सरकार की सभी योजनाओं को धरातल पर उतारने का काम कर रही है इसके बावजूद भी सरकार के द्वारा उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। सरकार जब तीन-तीन मुख्यमंत्री बदल सकती है तो आशाओं के लिए शासनादेश जारी क्यों नहीं कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि आशाओं को धमकी दी जा रही है कि काम पर लौटे नहीं तो निकाल दिये जायेगें। आशाओं के आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन आशायें कमजोर नहीं है, वह आंदोलन को जारी रखेंगी।
शनिवार को तहसील परिसर में प्रदर्शन करते हुए आशा कार्यकत्रिओं ने कहा कि सरकार ने उन्हें अब तक कोविड ड्यूटी का 10,000 रूपये बकाया भी नहीं दे पाई है और ना ही नियुक्ति से अब तक उनका मानदेय बढ़ाया है। स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ की हड्डी के तौर पर काम कर रही आशा वर्कर्स के साथ सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। प्रदेश सरकार से आशा कार्यकत्रियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा, न्यूनतम 21 हजार रुपये का मानदेय देने, जब तक मानदेय और कर्मचारियों का दर्जा मिलने तक अन्य विभागों से योजनाओं में लगे कार्मिकों की तरह मानदेय देने, सेवानिवृत्त होने पर पेंशन की सुविधा देने, कोविड कार्यों में लगी आशा कार्यकत्रियों को दस हजार रुपये मासिक भत्ता, 50 लाख रुपये का बीमा और दस लाख का स्वास्थ्य बीमा देने सहित 12 सूत्रीय मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की मांग की। प्रदर्शन करने वालों में अध्यक्ष प्रभा चौधरी, उपाध्यक्ष मीरा नेगी, सचिव रंजना कोटनाला, नीलम कुकरेती, समित्रा भट्ट, मधु ममगांई, गोदाम्बरी देवी, ऊषा, मेघा असवाल, दीपा रावत, कल्पना काला, सीमा, कांति कंडवाल, बबीता, सुरभि काला, मंजू देवी, कल्पना बिष्ट, सरिता, अनीता घिल्डियाल, सोनी कंडारी, संजू नेगी, विमला जोशी आदि शामिल थे।