नई दिल्ली, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सरकारी अस्पतालों में मुफ्त वितरण के लिए भेजी जाने वाली दवाओं की अवैध सप्लाई और बिक्री करने वाले एक बड़े संगठित रैकेट का भंडाफोड़ किया है. कार्रवाई में करीब 70 लाख रुपये मूल्य की दवाएं बरामद की गई हैं और अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. यह रैकेट पिछले डेढ़ साल से सक्रिय था और ब्रोकरों के नेटवर्क के जरिए कई शहरों में दवाओं की सप्लाई की जा रही थी.
डीसीपी क्राइम-4 पंकज कुमार ने बताया की क्राइम ब्रांच की एनआर-2 टीम को एसआई प्रीतम चंद की ओर से विकसित की गई गुप्त सूचना के आधार पर इस पूरे नेटवर्क का पता चला. इसके बाद इंस्पेक्टर नीरज शर्मा के नेतृत्व में और एसीपी गिरीश कौशिक की निगरानी में एक विशेष टीम गठित की गई. 2 अप्रैल, 2026 को टीम ने तिस हजारी स्थित जय भारत ट्रांसपोर्ट, राजेंद्र मार्केट में छापा मारा. यहां तीन आरोपी नीरज कुमार, सुशील कुमार और लक्ष्मण मुखिया को एक टेंपो और कार में बड़ी मात्रा में दवाएं ले जाते हुए दबोच लिया गया.
बरामद दवाओं पर सरकारी आपूर्ति — बिक्री के लिए नहीं अंकित था, जिससे स्पष्ट हुआ कि ये दवाएं सरकारी अस्पतालों से अवैध रूप से बाहर निकालकर बाजार में बेची जा रही थीं. पूछताछ में सामने आया कि मुख्य आरोपी नीरज कुमार सहारनपुर में आदित्य फार्मेसी के नाम से दवा का थोक कारोबार करता है और दिल्ली से अवैध रूप से दवाएं खरीदकर ब्रोकरों के जरिए अन्य शहरों में सप्लाई करता था. सुशील कुमार टैक्सी चालक के रूप में इन दवाओं के परिवहन में मदद करता था, जबकि लक्ष्मण मुखिया टेंपो के जरिए बड़ी खेप को ट्रांसपोर्ट हब तक पहुंचाता था.
जांच के दौरान खुलासा हुआ कि डीडीयू अस्पताल के फार्मासिस्ट/स्टोर कीपर बिनेश कुमार और संविदा सहायक प्रकाश मेहतो भी इस रैकेट में शामिल थे. ये दोनों अस्पताल के स्टॉक रिकॉर्ड में हेरफेर कर दवाओं को बाहर निकालते थे और फिर इन्हें अवैध बिक्री के लिए चैनलाइज करते थे. पुलिस ने इन दोनों को भी गिरफ्तार कर लिया है. बरामद दवाओं में एंटीबायोटिक्स और क्रिटिकल केयर इंजेक्शन जैसे सेफिक्सीम, अमोक्सिसिलिन, मेरोपेनेम, सेफ्ट्रिएक्सोन, रेबीज एंटीसीरम सहित कई महंगी दवाएं शामिल हैं, जो मरीजों को मुफ्त दी जानी थीं.
डीसीपी क्राइम-4 पंकज कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की सतर्कता और खुफिया तंत्र की मजबूती का परिणाम है. उन्होंने कहा कि इस तरह के रैकेट सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान, वित्तीय लेन-देन की जांच और पूरे मॉडस ऑपेरेंडी का खुलासा करने में जुटी है.