संसद बजट सत्र: ईरान युद्ध के चलते भारतीय एयरलाइंस ने 4335 फ्लाइट्स कैंसिल कीं, राज्यसभा में सरकार का जवाब

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नई दिल्ली,संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण का आज छठा दिन है. दो दिन स्थगन के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही सुबह 11 बजे फिर शुरू हुई. पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने राज्य के शीर्ष ब्यूरोक्रेट्स को हटाने के चुनाव आयोग के फैसले के विरोध में सोमवार को राज्यसभा से एक दिन का वॉकआउट किया.
शुक्रवार को टीएमसी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए दोनों सदनों में नोटिस दिया था.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को सभी सांसदों को पत्र लिखकर उनसे संसद की गरिमा और मर्यादा को बनाए रखने की अपील की. उन्होंने पत्र लिखा कि सदन और संसद परिसर में कुछ सदस्यों के आचरण से संसदीय लोकतंत्र की गरिमा और मान-मर्यादा प्रभावित हुई है. सदन में जिस तरह की भाषा का प्रयोग हो रहा है और सदस्यों का जो व्यवहार देखा जा रहा है, वह सभी के लिए गहरी चिंता का विषय है.
वहीं, आज राज्यसभा की 11 सीटों के लिए हरियाणा, बिहार और ओडिशा में चुनाव हो रहा है और शाम में नतीजे भी घोषित किए जाएंगे.
राज्यसभा में मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति ने सोमवार को केंद्र सरकार से कर्नाटक के रायचूर जिले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान (एम्स) स्थापित करने का आग्रह करते हुए कहा कि उत्तर कर्नाटक लंबे समय से विकास की बाट जोह रहा है और वहां स्वास्थ्य ढांचे की स्थिति काफी कमजोर है. उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए सुधा मूर्ति ने कहा कि केंद्र सरकार ने कई राज्यों में एम्स स्थापित किए हैं, लेकिन कर्नाटक में अब तक एक भी एम्स नहीं बनाया गया है.
उन्होंने कहा, मैं यह नहीं कह रही हूं कि इसे हुबली या बेंगलुरु में बनाया जाए, बल्कि इसे रायचूर जिले में स्थापित किया जाना चाहिए. सुधा मूर्ति ने कहा कि रायचूर उन जिलों में शामिल है जिन्हें नीति आयोग ने देश के सबसे पिछड़े जिलों में चिह्नित किया है. उन्होंने कहा कि उत्तर कर्नाटक क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहा है.
उन्होंने कहा कि दक्षिण कर्नाटक का विकास मैसुरु के वाडियार शासकों के कार्यकाल में हुआ, जबकि उत्तर कर्नाटक करीब 260 वर्षों से विकास के मामले में पिछड़ा रहा है. सुधा मूर्ति ने कहा कि इस क्षेत्र में पर्याप्त अस्पताल अवसंरचना और स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं, जिसके कारण मरीजों को इलाज के लिए दूर-दराज के शहरों का रुख करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि रायचूर और आसपास के इलाकों के लोग अक्सर इलाज के लिए हैदराबाद या बेंगलुरु जाते हैं.
उन्होंने कहा, वहां के गरीब लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों में रहने वाले लोगों की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ता है. सुधा मूर्ति ने रायचूर जिले में शिक्षा की स्थिति पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि जिले में साक्षरता दर काफी कम है, जहां महिला साक्षरता करीब 48 प्रतिशत और पुरुष साक्षरता करीब 60 प्रतिशत है. उन्होंने कहा कि रायचूर में एम्स की स्थापना से न केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच बेहतर होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे और छात्रों को भी चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे. मूर्ति ने कहा कि ऐसे संस्थानों की स्थापना से क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने में भी मदद मिल सकती है.
राज्यसभा के चेयरमैन सी. पी. राधाकृष्णन ने सदन को बताया कि अपर हाउस 28 और 29 मार्च के वीकेंड पर बैठेगा. उन्होंने कहा कि सरकार ने कुछ सदस्यों का अनुरोध मान लिया है कि नवरात्रि, गुड़ीपड़वा और रमजान जैसे त्योहारों की वजह से 19 और 20 मार्च को होने वाली बैठक कैंसिल कर दी जाएं. उन्होंने कहा कि समय की कमी को पूरा करने के लिए, राज्यसभा शनिवार, 28 मार्च और रविवार, 29 मार्च को मीटिंग करेगी.
केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा को बताया कि भारत में अभी 25,605 रुक्कत्र डिस्ट्रीब्यूटरशिप हैं, जिनमें से 17,677 ग्रामीण इलाकों में हैं, जिन्हें ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के 214 रुक्कत्र बॉटलिंग प्लांट से समर्थन मिलता है.
एक सवाल का जवाब देते हुए, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि अप्रैल 2016 और फरवरी 2026 के बीच 8,037 डिस्ट्रीब्यूटरशिप चालू की गई हैं, जिनमें से 93 प्रतिशत से ज्यादा एलपीजी की पहुंच को बेहतर बनाने के लिए ग्रामीण इलाकों में हैं. उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 10.56 करोड़ एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं, और सरकार एलपीजी को सस्ता बनाए रखने के लिए पीएमयूवाई के लाभार्थियों को हर सिलेंडर पर 300 रुपये की सब्सिडी दे रही है.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को राज्यसभा में विनियोग बिल, 2026 में पेश किया. यह विधेयक भारत सरकार को संचित निधि से अतिरिक्त सरकारी व्यय (उर्वरक, रक्षा, खाद्य सब्सिडी) निकालने को अधिकृत करता है.
नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने सोमवार को राज्यसभा को बताया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते भारतीय विमानन कंपनियों ने अब तक 4,335 फ्लाइट्स और विदेशी एयरलाइंस ने 1,187 फ्लाइट्स कैंसिल की हैं.
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के कारण पश्चिम एशिया में एयरस्पेस बंद होने की वजह से फ्लाइट ऑपरेशन में काफी बाधा आई है. प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक सवाल का जवाब देते हुए, मंत्री ने कहा कि एयरलाइन ऑपरेशन की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है. नायडू ने कहा, पश्चिम एशिया में एयरस्पेस बंद होने की वजह से फ्लाइट कैंसिलेशन के बारे में, अब तक, कुल मिलाकर, भारतीय एयरलाइंस ने 4,335 और विदेशी एयरलाइंस ने 1,187 फ्लाइट्स कैंसिल की हैं.
मंत्री ने कहा कि इस मुश्किल समय में ऑपरेशन की सुरक्षा सबसे जरूरी है. उन्होंने कहा कि जब एयरस्पेस ही बंद है, तो हमारे लिए इस इलाके में ऑपरेशन करने का कोई मतलब नहीं है. नायडू ने कहा कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) उन खास देशों के नियामकों के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं. मंत्री ने कहा, जब भी हमारे लिए ऑपरेशन करने का समय मिला, हमने ऑपरेशन किया. मैं आपको बता सकता हूं कि इस मुश्किल समय में भी लगभग 2,19,780 लोगों ने यात्रा की है.
नायडू ने कहा कि उनके मंत्रालय और डीजीसीए ने वहां के अधिकारियों के साथ मिलकर सुरक्षित ऑपरेशन सुनिश्चित किया है. मंत्री ने कहा, अभी भी कुछ एयरस्पेस बंद हैं, और हम उनके लिए सुविधा देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. लेकिन सबसे पहले और सबसे जरूरी बात, एयरस्पेस खुला होना चाहिए. यात्रा के लिए सुरक्षित होना चाहिए. तभी हम नियमित यात्रा कर सकते हैं.
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