जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : वनों को आग से बचाने के लिए सरकारी तंत्र तैयारियों में जुट गया है। लेकिन, जंगलों के किनारे चल रही शराब की पार्टी तंत्र की इस चुनौती को बढ़ा सकते हैं। दरअसल, शाम ढलते ही लैंसडौन वन प्रभाग क्षेत्र के जंगलों से लगी सड़कें बार में तब्दील हो जाती हैं। खुले आम शराब के जाम टकराते हुए सिगरेट के धुएं के छल्ले उड़ाए जाते हैं। ऐसे में शुष्क वातावरण में छोटी सी चिंगारी रौद्र रूप धारण कर सकती है।
शहर से सटे लैंसडौन वन प्रभाग के जंगल शाम ढ़लते ही शराबियों का अड्डा बन जाते हैं। सबसे बुरी स्थित कोटद्वार-पुलिंडा मोटर मार्ग की होती है, जहां शाम ढलते ही महफिलें सजने लगती हैं। इतना ही नहीं, डिग्री कालेज-मवाकोट रोड, सिद्धबली मंदिर-सनेह रोड, कोटद्वार-दुगड्डा रोड पर भी युवाओं की महफिलें नजर आए जाएंगी। पियक्कड़ जहां जंगलों में प्लास्टिक के गिलास, प्लेट, कांच की बोतलें फेंक जंगल की सुंदरता पर बदनुमा दाग लगाते हैं, वहीं वनों के लिए खतरा भी बने हुए हैं। कई बार यह पियक्कड़ असामाजिक तत्व जलती हुई सिगरेट व बीड़ी को भी जंगल में फेंक कर चले जाते हैं, जिससे आग का खतरा अधिक बढ़ जाता है। गर्मी बढ़ने के लिए यह स्थिति और अधिक विकराल रूप ले सकती है।
फूटी बोतलों से जानवरों को खतरा
मार्ग में असामाजिक तत्व शराब पीने के बाद खाली बोतलों को जंगल में तोड़ देते हैं। इससे जंगल में घूमने वाले जानवरों को खतरा बना रहता है। साथ ही गंदगी से भी जंगल बदसूरत होते जा रहे हैं। चौंकाने वाली बात तो यह है कि जंगलों की सुरक्षा का दावा करने वाला वन विभाग भी अपनी जिम्मेदारी को लेकर लापरवाह बना हुआ है। नतीजा, असामाजिक तत्वों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।