विकासनगर। क्षेत्र में शहीद सुरेश तोमर के नाम पर बने गास्की मार्ग की बदहाल स्थिति जिम्मेदारों की शहीद के प्रति संवेदनहीनता दिखा रही है। मार्ग पर आवागमन करना वाहन चालकों के लिए जोखिमभरा बना है। स्थानीय ग्रामीण कई बार मोटर मार्ग के डामरीकरण और सुधारीकरण की मांग कर चुके हैं, बावजूद उनकी मांग को हर बार अनसुना कर दिया जाता है। साल 2002 में गास्की के सुरेश तोमर ने सीमा पर देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। जवान की शहादत के बाद सरकार ने गांव के लिए शहीद के नाम पर मोटर मार्ग का निर्माण किया था। लेकिन मार्ग निर्माण के 12 साल बाद भी इस पर डामरीकरण नहीं किया गया है। बदहाल पड़े इस मोटर मार्ग पर ग्रामीण हर दिन जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। स्थानीय ग्रामीण रणवीर सिंह तोमर, सुमित तोमर, अरविंद, कल्याण सिंह, लेखराज तोमर ने बताया कि ग्रामीण इस मोटर मार्ग के डामरीकरण का सालों से सपना देख रहे हैं, लेकिन आलम यह है कि बरसात के बाद इस मोटर मार्ग पर न झाड़ी काटी गई और न मलबे को हटाया गया। मार्ग के दोनों ओर मलबे के टीले खड़े हैं। मोड़ पर कई बार वाहन आगे-पीछे करके मोड़ना पड़ता है। बरसात में जो दीवारें, स्कबर, नालियां टूट गई थीं, उनकी मरम्मत नहीं की गई। इस मोटर मार्ग से कई गांव जुड़े हुए हैं। किसानों को अपनी नगदी फसलें मंडी तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है। इसके साथ ही हर दिन हादसे का खतरा भी बना रहता है। मोटर मार्ग की दशा सुधारने के लिए ग्रामवासी कई बार लोक निर्माण विभाग से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान अभी तक नहीं हो पाया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि पांच साल में एक बार वोट मांगने जरूर आते हैं, लेकिन उसके बाद उन्हें जन सरोकारों से कोई लेना देना नहीं होता है। कहा कि कम से कम मूलभूत सुविधाओं को ठीक करना तो जिम्मेदारों की नैतिक जिम्मेदारी बनती है।