पारंपरिक कृषि को अपनी आजीविका में शामिल करें : पुरोहित

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श्रीनगर गढ़वाल : गढ़वाल विवि के घर से घर तक अभियान के संयोजक डा. विजयकांत पुरोहित ने कहा कि आज भी भारत कृषि प्रधान देश है। लेकिन बदलते दौर के साथ-साथ हम अपनी पारंपरिक खेती को भूलते जा रहे हैं। कहा कि भारत की भूमि श्रीअन्न की भूमि है। पहले हम कोदा, झंगोरा, कोणी, चीणा जैसे पौष्टिक, स्वास्थ्यवर्धक और मूल्यवान मोटे अनाजों को अपने खेतों में उगाते थे, लेकिन धीरे-धीरे किसान अपनी पारंपरिक खेती को छोड़ रहें है, जो कि चिंता का विषय है। आवश्यकता है कि हम पारंपरिक कृषि को अपनी आजीविका में शामिल करें। कहा इसमें गढ़वाल विवि के वैज्ञानिक भी सहायक बनेगें।
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विवि के ओर से मिलेट वर्ष-2023, भारत की जी-20 अध्यक्षता के साथ ही आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर घर से घर अभियान के तहत किसानों को श्रीअन्न (मोटे अनाज) के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान कीर्तिनगर, चौरास, बंदाशा, खिर्सू से पहुंची कृषक महिला एवं पुरूषों को गढ़वाल विवि के चौरास परिसर का शौक्षणिक भ्रमण करवाया गया। जहां उन्होंने बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से बंजर भूमि पर वैज्ञानिक विधि से उगाई गई कोणी, कोदा, चीणा, झंगोरा, रागी और मुंगफली के बारे में जानकारी ली। इस मौके पर कोट, पाबौ, कीर्तिनगर, चौरास, पठवाड़ा, बंदाशा से 100 से अधिक महिला और पुरूष काश्तकारों ने प्रतिभाग किया। (एजेंसी)

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