ऋषिकेश()। कॉर्मिशयल सिलेंडर की किल्लत ने खाद्य प्रतिष्ठान संचालकों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। एजेंसियों के गोदामों में कॉमर्शियल गैस के सिलेंडर गायब हैं। डिमांड के बाद भी कंपनियों से आपूर्ति नहीं हो पा रही है। संचालकों ने लकड़ी की भट्टी, इंडक्शन और स्टोव का सहारा ले रहे हैं, लेकिन इससे राहत नहीं मिल रही है। स्थिति यह है कि किराये की दुकानों में चलने वाले होटल और रेस्टोरेंट अब बंदी के कगार पर पहुंच रहे हैं। यात्रा बस अड्डा रोड पर रेस्टोरेंट चलाने वाले विरेंद्र सिंह भंडारी लकड़ी की भट्टी पर ग्राहकों के लिए भोजन बना रहे हैं। उन्होंने इंडक्शन भी रखा है, लेकिन महंगी लकड़ी की वजह से उनकी लागत बढ़ गई है। भोजन तैयार करने में ज्यादा समय लग रहा है, जिससे आमदनी पर सीधा असर पड़ा है। राजाराम गोदियाल स्टोव में डीजल डालकर चाय-नाश्ता आदि बना रहे हैं। उनकी मानें तो इसी तरह के हालात रहने पर रेस्टोरेंट चलाना मुश्किल हो जाएगा। यही समस्या नगर और आसपास क्षेत्र के होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, फूड स्टॉल संचालकों की भी है। दून मार्ग स्थित त्रिवेणी गैस एजेंसी संचालक सुनील सेमवाल ने बताया कि कॉर्मिशयल गैस सिलेंडर नहीं हैं। आशुतोष नगर में अंकुर गैस एजेंसी की भी यही हालत है। कॉर्मिशयल सिलेंडर की मांग लेकर पहुंच रहे खाद्य प्रतिष्ठान संचालकों को एजेंसी से हर दिन मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
बैकलॉग तेजी से बढ़ रहा: एजेंसियों में आपूर्ति का बैकलॉग कम नहीं हो पा रहा है। कुछ में बैकलॉग दो हजार तक पहुंच चुका है, तो कुछ में यह एक से डेढ हजार के बीच है। घरेलू सिलेंडर का स्टॉक आते ही फौरन खत्म हो जा रहा है। इससे बुकिंग के छह से सात दिन में भी स्थानीय लोगों को गैस नहीं मिल पा रही है। कॉर्मिशयल के साथ ही घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति की समस्या से क्षेत्र में बढ़ रही है। मालूम हो कि, ऋषिकेश व आसपास ग्रामीण क्षेत्र में कुल दस एजेंसियां संचालित हैं, जिनमें 98,250 हजार से ज्यादा घरेलू और 1,790 कॉर्मिशयल कनेक्शन धारक हैं।
कोट: कॉर्मिशयल सिलेंडर की आपूर्ति धीरे-धीरे शुरू हो रही है। सरकार की एसओपी के तहत ही खाद्य प्रतिष्ठान संचालक को कॉर्मिशयल सिलेंडर की आपूर्ति की जाएगी। एजेंसियों की निगरानी की जा रही है। कालाबाजारी और रिफिलिंग की रोकथाम को भी नियमित चेकिंग अभियान जारी हैं।