हरिद्वार()। आचार्य बालकृष्ण ने गुरुवार को प्रकृति के अनुरूप खेती अपनाने के साथ ही टिकाऊ कृषि पद्धतियों को आत्मनिर्भर गांवों की नींव बताया। पतंजलि के समृद्ध ग्राम प्रशिक्षण केंद्र में तीन दिनी एकीकृत कृषि क्लस्टर प्रशिक्षण के समापन अवसर पर उन्होंने कृषि को बहुआयामी बनाने पर जोर दिया। आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि यह पहल पतंजलि की किसान-केंद्रित, सतत कृषि और ग्रामीण विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस कार्यक्रम में 150 से अधिक स्वयं सहायता समूहों ने प्रशिक्षण हासिल किया। मुख्य अतिथि नेपाल के वन एवं पर्यावरण सचिव गोविंद प्रसाद शर्मा ने सतत कृषि, पर्यावरण संरक्षण और सीमा-पार सहयोग को समय की जरूरत बताया। इस प्रशिक्षण में मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, स्मार्ट एग्रीकल्चर, ‘धरती का डॉक्टर’ प्रशिक्षण और स्थानीय उत्पादों के गुणवत्ता नियंत्रण पर तकनीकी सत्र हुए। इस मौके पर नेपाल के अवर सचिव भारत खंडेल, खंड विकास अधिकारी-बहादराबाद मानस मित्तल आदि मौजूद रहे।