मुख्यमंत्री ने किया राजस्व लोक अदालत का शुभारम्भ
जयन्त प्रतिनिधि।
देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश में ‘राजस्व लोक अदालत’ का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय व्यवस्था को अधिक सरल, सुलभ एवं प्रभावी बनाते हुए आम जनमानस को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कहा कि यह पहल न्याय सुलभता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व लोक अदालत का आयोजन वर्षों से लंबित राजस्व विवादों के त्वरित एवं सार्थक समाधान हेतु किया गया है। कहा कि राजस्व संबंधी विवाद केवल कागजी प्रक्रिया नहीं होते, बल्कि इनके पीछे किसानों की भूमि, परिवारों की आजीविका एवं व्यक्तियों का आत्मसम्मान जुड़ा होता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में राजस्व विवादों के निस्तारण हेतु राज्य स्तर पर राजस्व परिषद, मंडल स्तर पर मंडलायुक्त न्यायालय, जिला स्तर पर कलेक्टर न्यायालय तथा तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार न्यायालय कार्यरत हैं। वर्तमान में प्रदेश में 400 से अधिक राजस्व न्यायालय संचालित हैं, जिनमें लगभग 50 हजार से अधिक प्रकरण लंबित हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार ने ‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारीकरण एवं संतुष्टि’ के मूल मंत्र के साथ ‘राजस्व लोक अदालत’ की अभिनव पहल प्रारम्भ की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘न्याय आपके द्वार’ की अवधारणा को साकार करते हुए प्रदेश के सभी 13 जनपदों में 210 स्थानों पर एक साथ राजस्व लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लगभग 6,933 मामलों का त्वरित निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस पहल के अंतर्गत भूमि विवादों के अतिरिक्त आबकारी, खाद्य, स्टाम्प, सरफेसी एक्ट, गुंडा एक्ट, सीआरपीसी, विद्युत अधिनियम, वरिष्ठ नागरिक अधिनियम एवं रेंट कंट्रोल एक्ट से संबंधित मामलों का भी समयबद्ध एवं पारदर्शी निस्तारण किया जाएगा। बैठक में राजस्व सचिव रंजना राजगुरु भी उपस्थित थीं।
निर्धारित समयसीमा में नामांतरण किया जाए
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अविवादित विरासत के मामलों में भू-स्वामी की मृत्यु के पश्चात निर्धारित समयसीमा के भीतर नामांतरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि मृतक की तेहरवीं/पीपलपानी तक वारिसों के नाम नामांतरण की प्रक्रिया पूर्ण कर नई खतौनी परिवार को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, उन्होंने विवादित भूमि की पैमाइश एवं कब्जों से संबंधित मामलों को एक माह के भीतर निस्तारित करने के निर्देश दिए।