देहरादून। दून में पुलिस का सिस्टम किस कदर बेलगाम और सुस्त हो चुका है, इसका अंदाजा पुलिस के चक्कर काट रहे ओएनजीसी अफसर की बेबसी से लगाया जा सकता है। ओएनजीसी के पूर्व एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (ईडी) की पत्नी से सरेराह मोबाइल और बैग लूट की घटना के 14 दिन बाद बसंत विहार थाना पुलिस ने केस किया। हद तो तब हो गई जब पूर्व डीजीपी अशोक कुमार ने खुद एसपी सिटी से संपर्क किया। पुलिस के कानों पर तब भी जूं तक नहीं रेंगी। जीएमएस रोड स्थित लेन-12, मोहित नगर निवासी मनोज बर्थवाल वर्ष 2022 में ओएनजीसी से एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद से रिटायर हुए हैं। उनके अनुसार 24 मार्च की शाम करीब 6:30 बजे उनकी पत्नी सुनंदा बर्थवाल बसंत विहार कॉलोनी फेज-2 में टहल रही थीं। इसी बीच पीछे से एक स्कूटर सवार आया और झपट्टा मारकर उनका बैग छीन ले गया। बैग में सैमसंग गैलेक्सी एस-25 अल्ट्रा मोबाइल और कुछ नगदी थी। आरोपी का चेहरा ढका हुआ था और नंबर प्लेट पर मिट्टी लगी थी। घटना के तुरंत बाद उसी दिन बसंत विहार थाने में तहरीर दी गई। पुलिस ने न तो मुकदमा दर्ज किया और न ही शिकायत की कोई रिसीविंग दी। मनोज बर्थवाल घटना के बाद किसी काम से दिल्ली चले गए। जब उनकी पत्नी ने नए फोन में अपना नंबर एक्टिवेट किया, तो छीने गए पुराने फोन की लोकेशन मोथरोवाला में शो हुई। दो दिन बाद यह लोकेशन चुक्खुवाला में दिखाई दी। इसके बाद पुलिस ने कुछ नहीं किया।यह मामला पुलिस की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करता है जहां रसूख भी काम नहीं आ रहा। ऐसे में आम आदमी की क्या बिसात होगी। मनोज बर्थवाल के पिता आईबी में थे और ससुर यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं। खुद मनोज बर्थवाल के प्रदेश के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार से करीबी संबंध हैं। पूर्व डीजीपी ने भी मामले में एसपी सिटी प्रमोद कुमार से संपर्क किया। बावजूद इसके थाना पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया। पीड़ित दो अप्रैल को एसएसपी से भी मिले और मंगलवार को ईमेल के जरिए शिकायत दी। तब जाकर मंगलवार रात को केस दर्ज हुआ। एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल का कहना है कि मुकदमा दर्ज न करना गंभीर है। इसमें क्यों देरी की गई इसकी समीक्षा कर उस पर फैसला लिया जाएगा।