बरनाला , पंजाब के बरनाला में शनिवार को आयोजित कांग्रेस की महारैली में वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने पार्टी के भीतर गुटबाजी पर खुलकर नाराजगी जताई। उन्होंने मंच से नेताओं को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि पार्टी में व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि टीम वर्क सर्वोपरि होना चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा, “कोई एक खिलाड़ी मैच नहीं जिता सकता। कांग्रेस के पास पूरी टीम है और सभी को टीम प्लेयर की तरह काम करना होगा। राहुल गांधी ने कहा कि मैं मैसेज देना चाहता हूं कि टीम प्लेयर बनो। वरना रिजर्व में बैठा देंगे। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर कोई नेता टीम भावना से काम नहीं करेगा तो वे और कांग्रेस अध्यक्ष रूड्डद्यद्यद्बद्मड्डह्म्द्भह्वठ्ठ ्यद्धड्डह्म्द्दद्ग मिलकर कार्रवाई करेंगे। राहुल ने यह भी रेखांकित किया कि कांग्रेस की असली ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता हैं और पंजाब में भविष्य की राजनीति उनके सम्मान और भागीदारी से तय होगी।
मजूदरों के हाथों से मनरेगा को छीन लिया
राहुल गांधी ने कहा कि पंजाब के किसानों को याद रखना है कि पहले आपको बेचने की कोशिश की थी। तीन कानून लाए थे। अब मजूदरों के हाथों से मनरेगा को छीन लिया। हम किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों के साथ खड़े हैं। नरेंद्र मोदी जब भाषण देता है उनकी आंखों में देखो और अपने आप से पूछो कि क्या यह व्यक्ति सच बोल रहा है। आपको जवाब मिल जाएगा।
भारत-अमेरिका डील पर केंद्र सरकार पर हमला
रैली के दौरान राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मुद्दे पर घेरा। उन्होंने दावा किया कि चार महीनों तक रुकी रही डील अचानक आगे बढ़ा दी गई। राहुल ने आरोप लगाया कि संसद में उनके भाषण के दौरान व्यवधान डाला गया और उसी दिन शाम को प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत की। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस डील में सोयाबीन, अखरोट, बादाम जैसी कृषि उपज के आयात का रास्ता खोल दिया गया है, जिससे हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के किसानों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
खड़गे का दो मोर्चों पर संघर्ष का आह्वान
रैली से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने किसानों और मजदूरों को संबोधित करते हुए कहा कि पंजाब की धरती हमेशा संघर्ष की प्रतीक रही है। उन्होंने कहा कि जैसे किसानों ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, वैसे ही अब उन्हें दो मोर्चों पर संघर्ष करना होगा। एक केंद्र सरकार के खिलाफ और दूसरा राज्य सरकार के खिलाफ।