जयन्त प्रतिनिधि।
पैठाणी : श्री आदर्श राठ रामलीला मंचन समिति की ओर से पैठाणी में रामलीला का मंचन किया जा रहा है। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य डा. शिवचरण नौडियाल ने अभिभावकों से अपने बच्चों को अपनी संस्कृति व सभ्यता से परिचय करवाने की अपील की। कहा कि रामलीला हमारी संस्कृति और आदर्शों का जीवंत स्वरूप है।
रामलीला मंचन मेन बाजार पैठाणी पार्क में किया जा रहा है। छठवें दिवस में पहुंचे जिला पंचायत सदस्य टीला डॉ. शिवचरण नौडियाल ने रामलीला मंचन की सराहना करते हुए कहा कि रामलीला केवल एक मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि हमारी प्राचीन संस्कृति, संस्कार और आदर्शों का जीवंत स्वरूप है। उन्होंने श्रीराम के वनवास का उदाहरण देते हुए कहा कि जब एक पुत्र ने पिता की आज्ञा पर 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया तो उसका छोटा भाई भी सबकुछ छोड़कर साथ चला गया। यही हमारे संस्कार हैं, जो आज के समय में नई पीढ़ी को जानने और अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अगर हमें अपनी संस्कृति और परिवार को बचाना है तो नशे से दूरी बनानी ही होगी। मंचन में दिखाया गया कि भगवान राम, लक्ष्मण और सीता वन गमन करते हुए पंचवटी पहुंचते हैं। वहां रावण की बहन शूर्पणखा आती है और राम-लक्ष्मण को देखकर उनसे आकर्षित होती है। वह उनसे विवाह का प्रस्ताव रखती है। जब दोनों भाई उसके प्रस्ताव को ठुकरा देते हैं, तो वह राक्षसी वेश में आकर सीता पर हमला करने का प्रयास करती है। भगवान श्रीराम की आज्ञा पाकर लक्ष्मण शूर्पणखा के नाक और कान काट देते हैं। इसके बाद शूर्पणखा खर-दूषण के पास जाती है, जो अपनी राक्षसी सेना के साथ बदला लेने के लिए राम से युद्ध करते हैं और सभी श्रीराम के हाथों मारे जाते हैं। शूर्पणखा फिर रावण से गुहार लगाती है। रावण युद्ध के बजाय सीता का हरण करने की योजना बनाता है। इस योजना के तहत, रावण मारीच को स्वर्ण मृग बनने के लिए मजबूर करता है। जब राम और लक्ष्मण कुटिया में नहीं होते, तो रावण मौका पाकर सीता का हरण कर लेता है। कलाकारों की इस प्रस्तुति की दर्शकों ने खूब सराहना की। इस अवसर पर पूर्व राज्य मंत्री राजेंद्र रौथाण, अधिशासी अभियंता पाबौ शिवम मित्तल, यूसीएफ के निवर्तमान चेयरमैन मातबर रावत, रामलीला समिति अध्यक्ष मनवर सिंह, नरेंद्र नेगी, संरक्षक वीरेंद्र रावत, डायरेक्टर नत्थी राम नौडियाल, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के खंड कार्यवाह आनंद रावत पार्थ, प्रधान घंडियाली डबल रावत, पूर्व प्रधान खण्ड तल्ली आनन्दमणि, दीपक सिंह नेगी आदि उपस्थित रहे।