नगर निगम की सुस्त कार्यप्रणाली से बिगड़ रही व्यवस्था
रेहड़ी ठेली के लिए अब तक नहीं हो पाई स्थाई व्यवस्था
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : किसी भी शहर में रेहड़ी-ठेली लगाने से पूर्व नगर निगम में पंजीकरण किया जाता है। जिसके बाद नगर निगम रेहड़ी-ठेली संचालकों को लाइसेंस उपलब्ध करवाता है। लेकिन, कोटद्वार शहर में व्यवस्थाएं बेपटरी हो चली हैं। हालत यह है कि नगर निगम में पिछले दो वर्षों से पंजीकरण की व्यवस्था ठप पड़ी हुई है। नतीजा, शहर में लगातार बढ़ती रेहड़ी-ठेली की संख्या यातायात सहित अन्य व्यवस्था में बाधा बन रही है।
गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार में शायद ही कोई ऐसी सड़क दिखाई दें जहां बेतरतीब तरीके से खड़ी रेहड़ी-ठेली नजर न आए। हाईवे के साथ ही अन्य मार्गों पर खड़ी यह रेहड़ी-ठेली शहर की यातायात व्यवस्था में सबसे अधिक बाधा उत्पन्न कर रही है। बावजूद नगर निगम आज तक रेहड़ी-ठेली के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं बना पाया है। स्थिति यह है कि नगर निगम ने पिछले दो वर्षों से रेहड़ी-ठेली का ट्रेड लाइसेंस बनाना भी बंद कर दिया है। ऐसे में बिना शहर में प्रतिदिन रेहड़ी-ठेली की संख्या बढ़ती जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक शहर में करीब दो हजार से अधिक रेहड़ी-ठेली घूम रही हैं। सबसे अधिक रेहड़ी-ठेली गोखले मार्ग, पटेल मार्ग, स्टेशन रोड, देवी रोड, बदरीनाथ मार्ग पर घूमती रहती हैं। जबकि, यही मार्ग शहर के सबसे व्यस्त मार्ग है।
निगम को तहबाजारी का लालच
तहबाजारी के लालच में नगर निगम शहर में लगातार बढ़ती रेहड़ी-ठेली की संख्या को लेकर लापरवाह बना हुआ है। दरअसल, प्रतिदिन नगर निगम शहर से रेहड़ी-ठेली वालों से हजारों की तहबाजारी वसूलता है। ऐसे में जितनी रेहड़ी-ठेली बढ़ेगी नगर निगम को उतरा ही राजस्व मिलेगा। जबकि, इस लापरवाही से शहर की व्यवस्थाएं भी प्रभावित हो रही हैं। शहर में रेहड़ी ठेली वालों के लिए स्थाई व्यवस्था बनाने व इनकी संख्या को सीमित करने के लिए शहरवासी कई बार जनप्रतिनिधि व अधिकारियों से शिकायत भी कर चुके हैं। लेकिन, अब तक समस्या को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई।
सुरक्षा को लेकर भी सवाल
शहर में लगातार बढ़ती रेहड़ी-ठेली की संख्या शहर की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर रही है। दरअसल, अधिकांश रेहड़ी-ठेली वाले उत्तर प्रदेश के विभिन्न गांव से आते हैं। ऐसे में यह सुबह शहर में आते हैं और शाम को चले जाते हैं। रेहड़ी-ठेली वालों के बारे में नगर निगम व पुलिस के पास किसी भी तरह की जानकारी नहीं होती। ऐसे में यदि कोई आपराधिक घटना होती है तो पुलिस के हाथ खली ही रहेंगे। जबकि, पूर्व में गोखले मार्ग में कई बार टप्पेबाजी की घटनाएं भी हो चुकी हैं।