विजय हजारे ट्रॉफी में रिंकू सिंह का कोहराम, 38 कप्तानों को पछाड़कर बने नंबर-1

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नई दिल्ली ,। भारतीय क्रिकेट के स्टार फिनिशर रिंकू सिंह का बल्ला विजय हजारे ट्रॉफी में आग उगल रहा है। टूर्नामेंट के आगाज के साथ ही रिंकू ने अपनी कप्तानी और बल्लेबाजी से ऐसा समां बांधा है कि वह टूर्नामेंट में खेल रही सभी 38 टीमों के कप्तानों के बीच ‘नंबर वनÓ बन गए हैं। रिंकू सिंह ने अपनी टीम उत्तर प्रदेश (यूपी) के लिए कभी संकटमोचक तो कभी फिनिशर की भूमिका निभाते हुए शानदार प्रदर्शन किया है। उनकी कप्तानी में यूपी की टीम विजय रथ पर सवार है और रिंकू ने अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया है कि ‘जैसा कप्तान, वैसी टीमÓ की कहावत उन पर पूरी तरह सटीक बैठती है।
ग्रुप बी में यूपी का दबदबा
विजय हजारे ट्रॉफी में 38 टीमों को चार एलिट ग्रुप और एक प्लेट ग्रुप में बांटा गया है। रिंकू सिंह की अगुवाई वाली यूपी की टीम एलिट ग्रुप-बी का हिस्सा है, जिसमें विदर्भ, बंगाल, बड़ौदा, जम्मू-कश्मीर, असम, हैदराबाद और चंडीगढ़ जैसी मजबूत टीमें शामिल हैं। रिंकू सिंह ने न केवल अपने ग्रुप के कप्तानों को पीछे छोड़ा है, बल्कि टूर्नामेंट के अन्य सभी ग्रुप के कप्तानों के मुकाबले भी उनका प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा है। रिंकू की कप्तानी में यूपी ने अब तक खेले गए अपने सभी 4 मैचों में जीत दर्ज की है और वह अपने ग्रुप की इकलौती ऐसी टीम है, जिसने अब तक एक भी मुकाबला नहीं हारा है।
4 मैचों में 273 रन, औसत ने सबको चौंकाया
रिंकू सिंह के आंकड़ों पर नजर डालें तो उन्होंने अब तक 4 मैचों की 4 पारियों में 136.50 की अविश्वसनीय औसत से 273 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से एक शतक और दो अर्धशतक निकले हैं। रिंकू ने अपनी पारियों में 11 आसमानी छक्के और 23 चौके लगाकर गेंदबाजों की जमकर खबर ली है। खास बात यह है कि वह दो पारियों में नाबाद भी रहे। इसमें से एक उनका शतक था और दूसरी 31 दिसंबर को असम के खिलाफ खेली गई पारी, जिसमें उन्होंने नाबाद 37 रन बनाकर टीम को जीत की दहलीज तक पहुंचाया।
रनों और औसत के मामले में टॉप पर
इस धमाकेदार प्रदर्शन के दम पर रिंकू सिंह टूर्नामेंट में खेल रहे सभी 38 कप्तानों के बीच सबसे ज्यादा रन बनाने वाले कप्तान बन गए हैं। इतना ही नहीं, उनका बल्लेबाजी औसत भी बाकी सभी कप्तानों के मुकाबले सबसे बेहतर है। रिंकू सिंह का यही शानदार फॉर्म उत्तर प्रदेश की सफलता की कहानी लिख रहा है। उनकी नेतृत्व क्षमता और बल्ले से निकल रहे रनों ने टीम को खिताब का प्रबल दावेदार बना दिया है।

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