उच्छाडुंगी और हनी वेदा फाउंडेशन के बीच ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई दिशा

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शहद प्रसंस्करण एवं मधुमक्खी पालन क्षेत्र के सशक्तिकरण हेतु हुआ महत्वपूर्ण समझौता
जयन्त प्रतिनिधि।
रूद्रप्रयाग : उच्छाडुंगी क्लस्टर लेवल फेडरेशन हनी प्रसंस्करण विकास केंद्र और गुजरात स्थित हनी वेदा फाउंडेशन के बीच आज एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, किसानों की आय में वृद्धि करने तथा शहद प्रसंस्करण व मधुमक्खी पालन क्षेत्र को नई दिशा प्रदान करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य कृषि मूल्य श्रृंखला को विकसित करना, शहद प्रसंस्करण इकाइयों की क्षमता बढ़ाना और मधुमक्खी पालन से जुड़े किसानों एवं महिलाओं की आय में स्थायी वृद्धि करना है। यह पहल उछाडुंगी को शहद प्रसंस्करण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सहायक होगी तथा स्थानीय समुदायों के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी। इसके अंतर्गत प्रमुख क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य किया जाएगा, जिसमें कृषि मूल्य श्रृंखला का विकास एवं किसानों की आय में वृद्धि, शहद एवं संबंधित उत्पादों की संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाया जाएगा, जिससे किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त हो सके। उत्पाद विकास एवं परिष्करण सेवाएं, आधुनिक तकनीकों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण और नवीन शहद उत्पाद विकसित किए जाएंगे। बाजार अनुसंधान एवं विश्लेषण, उत्पादों के लिए संभावित बाजारों और उपभोक्ता वर्ग की पहचान कर प्रभावी विपणन योजना तैयार की जाएगी। ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग विकास, उत्पादों के लिए आकर्षक, विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी ब्रांड पहचान स्थापित की जाएगी तथा आधुनिक पैकेजिंग समाधान विकसित किए जाएंगे, बिक्री एवं विपणन समर्थन, उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने हेतु रणनीतिक विपणन सहायता प्रदान की जाएगी। तकनीकी सलाहकार सेवाएं, शहद प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण और मधुमक्खी पालन की नवीन तकनीकों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम, किसानों, सदस्यों एवं प्रतिनिधियों को आधुनिक तकनीकों, गुणवत्ता मानकों एवं उद्यमिता कौशलों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। गुणवत्ता आश्वासन एवं प्रमाणन समर्थन, उत्पादों की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी तथा आवश्यक गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त करने में सहयोग प्रदान किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि यह स्थानीय किसानों, महिला समूहों और उद्यमियों के लिए नए अवसरों का सृजन करेगा तथा शहद प्रसंस्करण इकाइयों की दक्षता और उत्पादों की बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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