ग्रामीण महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति सजग बनाने वाली अमिता सुयाल नहीं रही

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जयन्त प्रतिनिधि।
पौड़ी।
ग्रामीण महिलाओं कोे उनके अधिकारों के प्रति सजग बनाने व जागरुकता फैलाने वाली महिला अधिकारों की पोषक अमिता सुयाल का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। वे आजीवन गांव-गांव जाकर महिलाओं को उनके अधिकारियों के प्रति जागरुक करती रही। इसके साथ ही क्षेत्र में बढ़ते शराब व जुए के प्रचलन के खिलाफ आंदोलन की अगुवा भी रही। वे अपने पीछे एक बेटा व दो बेटियों का हरा-भरा परिवार छोड़ गई हैं।
तहसील व विकास खंड मुख्यालय थलीसैण निवासी 80 वर्षीय अमिता सुयाल का निधन हो गया है। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है। अमिता का अंतिम संस्कार घटबगड़ घाट पर किया गया। उन्हें बेटे पृथ्वीधर सुयाल ने मुखाग्नि दी। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य व सामाजिक कार्यकर्ता शंभू प्रसाद मंमगाई ने बताया कि अमिता सुयाल बीरोंखाल के जिवाई गांव की रहने वाली हैं। उनका विवाह 60 वर्ष पहले कमडई गांव निवासी व जीआईसी बीरोंखाल में संस्कृत प्रवक्ता के पद पर सेवारत दाताराम सुयाल से हुआ था। अमिता ग्राम विकास अधिकारी के पद पर सेवारत थी। लेकिन शादी के बाद उन्हें परिवार ने नौकरी करने की इजाजत नहीं दी। जिसके बाद उनकी नौकरी छूट गई। मंमगाई ने बताया कि नौकरी छूटने के बाद अमिता ने समाज को जागरुक बनाने के लिए आंदोलन छेड़ दिया। उन्होंने बताया कि पति के निधन के बाद अमिता सपरिवार करीब 26 वर्ष पहले थलीसैण आकर बस गई। यहां उन्होंने गांव-गांव जाकर महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक किया। कैन्यूर, मुसेटी, कफल्ड, कपरोली, ऐठी, बग्वाड़ी, रोली, जखोला, पोखरी सहित क्षेत्र के 30 से अधिक गांवों में उन्होंने जागरुकता अभियान चलाए। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य मंमगाई ने बताया कि वर्ष 1995-96 में अमिता ने क्षेत्र के गांवों में महिलाओं को एकत्रित कर 15 से अधिक महिला मंगल दलों का गठन किया। ये महिलाएं लगातार क्षेत्र में बढ़ रहे शराब व जुए के प्रचलन के खिलाफ मुखर होकर आंदोलन करने लगी। जिससे क्षेत्र में इन सामाजिक बुराईयों के प्रति समाज जागरुक होने लगा। वर्तमान में इन क्षेत्रों में महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं। लॉकडाउन जैसी स्थिति में ग्रामीण महिलाएं स्वयं के संसाधनों को मजबूत कर परिवार की आजीविका में अहम योगदान दे रही हैं। शंभू प्रसाद मंमगाई ने बताया कि अमिता को क्षेत्र में सामाजिक चेतना के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

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