साधकों ने ध्यान और मंत्रोच्चार से शांति और दिव्य ऊर्जा का किया अनुभव

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ऋषिकेश()। परमार्थ निकेतन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को साधकों ने योग और ध्यान के जरिए दिव्य ऊर्जा का अनुभव किया। इस दौरान साधकों ने विभिन्न योग क्रियाओं का अभ्यास भी किया। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती और डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती के सान्निध्य में साधकों ने महर्षि महेश योगी आश्रम की पवित्र भूमि पर विशेष ध्यान साधना की। इस दौरान विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थना की गई। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और हरित संवर्द्धन के रुद्राक्ष के पौधों का रोपण करते हुए प्रकृति के साथ सामंजस्य और संतुलन बनाए रखने का स्वामी चिदानंद सरस्वती ने संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह वही दिव्य स्थल है, जहां कभी बीटल्स ने ध्यान साधना की थी। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि योग शक्ति है, भक्ति है, संगीत है और शांति भी है। योग दिलों और देशों के साथ प्रकृति और संस्कृति को जोड़ता है। यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य सेतु है। उन्होंने वैश्विक योगी समुदाय का आह्वान करते हुए कहा कि योग की इस शक्ति से हम विश्व शांति की दिशा में कदम बढ़ाएं। आइए भारत की दिव्य योग परंपरा और उत्तराखंड की पावन कंदराओं से निकलने वाली ध्यान-साधना की विधाओं को आत्मसात करते के लिए योग से जुड़ें। इसे जिएं और जीवन को एक नई दिशा दें। डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती ने गाइडेड मेडिटेशन कराते हुए प्रतिभागियों को अपने भीतर की ऊर्जा और शांति से जुड़ने का मार्ग दिखाया।

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