हरिद्वार। जैन धर्म की प्रख्यात साध्वी आर्यिका रत्न पूर्णमति माता के हरिद्वार आगमन पर विभिन्न स्थानों पर उनका स्वागत किया गया। जूर्स कंट्री में आयोजित सत्संग कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवनभर जिन वस्तुओं को एकत्र करता है, वे अंततः निरर्थक सिद्ध होती हैं। व्यक्ति के साथ केवल उसके कर्म ही जाते हैं, इसलिए कर्मों को सुधारने और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की आवश्यकता है। हरिद्वार पहुंचने पर पतंजलि योगपीठ में योगगुरु स्वामी रामदेव और पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर स्वामी रामदेव ने कहा कि साध्वी पूर्णमति का त्यागमय जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है और उनके प्रवचनों से लोगों को आध्यात्मिक दिशा मिलती है। सत्संग के दौरान साध्वी पूर्णमति ने कहा कि हरिद्वार क्षेत्र भगवान ऋषभदेव की तपस्थली रहा है, किंतु वर्तमान में यहां उनकी स्मृतियों का कोई प्रमुख चिह्न नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि यहां इसकी स्थापना की जाए। कार्यक्रम में यूसी जैन, संदीप जैन, बालेश जैन, निर्मल जैन, सतीश जैन, विजय जैन, संदीप जैन ओमेगा, रवि जैन, समर्थ जैन, पीयूष जैन, नितेश जैन, आदेश जैन, ओमकार जैन और विजय जैन ज्वालापुर सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभा का संचालन अरविंद शास्त्री ने किया।