नई दिल्ली, दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि केवल पंचायती तलाक के आधार पर दूसरी शादी मान्य नहीं हो सकती है. जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हिन्दू मैरिज एक्ट के प्रावधान के किसी भी शर्त के उल्लंघन पर किसी शादी को मान्यता नहीं दी जा सकती.
याचिकाकर्ता महिला जाट समुदाय की है और उसने जाट समुदाय के रिवाज के मुताबिक अपने पहले पति से पंचायती तलाक को मान्य होने और इस आधार पर अपनी दूसरी शादी के वैध होने का दावा कर रही थी. महिला ने 7 जून 2024 के फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी. फैमिली कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि दूसरे पति के साथ उसकी शादी अमान्य थी क्योंकि यह हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 5(1) के साथ-साथ धारा 11 का उल्लंघन था. इन प्रावधानों के तहत अगर शादी के वक्त पति या पत्नी दोनों में से किसी भी पक्ष की दूसरे जीवित व्यक्ति के साथ पहली शादी कायम हो, तो दूसरी शादी शुरु से ही कानूनन अमान्य है.
सुनवाई के दौरान महिला की ओर से कहा गया कि उसका अपने पूर्व पति से 23 मई 2009 को पंयायती तलाक हो गया था. महिला का दूसरा पति भी शादीशुदा था. दूसरे पति ने अपनी पहली पत्नी से 25 मई 2009 को कोर्ट के जरिये तलाक हो गया था. दूसरे पति को अपनी पहली पत्नी से एक बच्ची भी थी. महिला अपने दूसरे पति से 16 मई 2010 को शादी की जिसके बाद 15 मार्च को एक बच्चा भी पैदा हुआ.
महिला और दूसरे पति के बीच भी विवाद हुआ और दूसरे पति ने तलाक की अर्जी कोर्ट में दाखिल की, लेकिन दूसरे पति ने 12 अक्टूबर 2012 को तलाक की अर्जी वापस ले ली. दूसरे पति को 25 सितंबर 2013 को पता चला कि महिला ने अपने पहले पति से तलाक नहीं लिया है. उसके बाद उसने अक्टूबर 2013 में तलाक की अर्जी दाखिल की. जिसके बाद फैमिली कोर्ट ने 7 जून 2024 को महिला का दूसरे पति के साथ हुई शादी को अवैध करार देते हुए कहा कि ये शादी हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 5(1) और धारा 11 का उल्लंघन कर की गई है। ऐसे में ये शादी मान्य नहीं है.