अल्मोड़ा()। इनाकोट में आयोजित संगोष्ठी में वनाग्नि और मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई गई। लोक प्रबंध विकास संस्था और वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में अल्मोड़ा वन प्रभाग, सिविल सोयम वन प्रभाग और बिनसर वन्यजीव विहार के अधिकारियों ने भाग लिया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में जंगल और समुदाय के संबंधों में बदलाव आया है और ग्रामीणों की जंगल पर निर्भरता भी कम हुई है। बदलते हालात में वनाग्नि की घटनाओं से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। वक्ताओं ने आग नियंत्रण के लिए सीजनल फायर वॉचरों की नियुक्ति अवधि बढ़ाने, फायर लाइन निर्माण में तेजी लाने, जंगलों में आग लगाने की घटनाओं पर नियंत्रण और पिकनिक स्थलों पर निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता बताई। मानव-वन्यजीव संघर्ष के मुद्दे पर भी विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती वन्यजीवों की आवाजाही को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की। वन क्षेत्राधिकारी मोहन राम ने बसोली और ताकुला क्षेत्र में बंदरों को पकड़ने और तेंदुओं की गतिविधियों पर नजर रखकर आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। संगोष्ठी में वन क्षेत्राधिकारी मनोज सनवाल, वन दरोगा हरेंद्र सतवाल, वन पंचायत संगठन के अध्यक्ष सुंदर सिंह पिलख्वाल, सचिव पूरन सिंह, डूंगर सिंह, किशोर तिवारी, देवेंद्र सिंह, बहादुर मेहता, जगमोहन चोपता, ग्राम प्रधान ज्योति डंगवाल, कनिष्ठ प्रमुख निर्मल नयाल, मदन बिष्ट, क्षेत्रीय संसाधन पंचायत की अध्यक्ष पूजा बिष्ट बालम सिंह सुयाल, चंदन सिंह सहित अन्य लोगों ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन ईश्वर जोशी ने किया।