उत्तरकाशी()। नगर क्षेत्र के गंगोरी में लाखों की लागत से बना सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट जर्जर होने के साथ ही उसके आसपास झाड़ियां उग पाई है। इससे एक बड़ा क्षेत्र अभी तक सीवरेज ट्रीटमेंट योजना से नहीं जुड़ पाया है। इससे सीवेज प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सीधा अस्सी गंगा और भागीरथी नदी में जा रहा है लेकिन निर्माण एवं अनुरक्षण ईकाई (गंगा) पेयजल निगम की ओर से इसके सुधारीकरण के लिए कदम नहीं उठाए गए हैं। पूर्व सभासद देवेंद्र चौहान ने कहा कि गंगोरी क्षेत्र को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ने के लिए वर्षों पूर्व विभाग की ओर से निर्माण तो किया गया लेकिन उसके बाद लाखों की धनराशि खर्च करने के बाद अभी तक इसका प्रयोग नहीं हो पाया है। साथ ही भागीरथी नदी में आई बाढ़ में भी इसका कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। निर्माण एवं अनुरक्षण ईकाई (गंगा) पेजयल निगम की अनदेखी के कारण गंगोरी का एक बड़ा क्षेत्र अभी तक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से नहीं जुड़ पाया है जबकि पिछले पांच से छह वर्षों में गंगोरी में जनसंख्या में लगातार वृद्धि हुई है। स्थानीय लोगों की ओर से सीवरेज गड्ढे बनाकर ही उसको नालियों आदि से जोड़ा जा रहा है। इससे नालियों से सीवरेज सीधा नदियों में जा रहा है जो कि गंगा स्वच्छता पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
क्षेत्र ईको सेंसटिव जोन के तहत आता है। चौहान ने कहा कि जिला प्रशासन को इसका संज्ञान लेकर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को शुरू करवाना चाहिए। इससे एक बड़ा क्षेत्र प्लांट से जुड़ पाएगा और गंगा भी स्वच्छ रहेगी। विभाग के परियोजना प्रबंधक मानवेंद्र कफोला का कहना है कि गंगोरी के प्लांट को नई योजना में शामिल किया गया है। जल्द ही इसका सुधारीकरण किया जाएगा।