तिरुवनंतपुरम। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि अमेरिका-इस्राइल और ईरान के युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद है, जिससे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि संघर्ष में ईरान ज्यादा नुकसान झेल रहा है, लेकिन वह तेल और जहाजों के रास्ते सीमित कर दुनिया पर दबाव बनाए रख सकता है।
अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध पर शनिवार को कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य तभी खुल सकता है जब युद्ध खत्म होगा, क्योंकि ईरान के पास दुनिया पर दबाव बनाने के बहुत कम तरीके हैं। उन्होंने कहा कि इस समय ईरान कमजोर स्थिति में है। थरूर ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और करीब पांच हजार ईरानी भी मारे गए हैं। संघर्ष का संतुलन पूरी तरह ईरान के खिलाफ रहा है। ईरान में ज्यादा तबाही मची है और उस पर ज्यादा मिसाइल हमले हुए हैं, जबकि ईरानी ड्रोन और मिसाइलों से अन्य जगहों पर कम हमले हुए हैं। इसलिए ईरान फिलहाल हमलों का ज्यादा शिकार हो रहा है।
‘दुनिया के लिए चीजें मुश्किल बना सकता है ईरान’
उन्होंने आगे कहा, ऐसी स्थिति में ईरान दुनिया के लिए तेल आपूर्ति, जहाजों की आवाजाही और हवाई मार्ग को सीमित करके चीजों को मुश्किल और महंगा बना सकता है। यही उसका दबाव बनाने का तरीका है। उन्होंने कहा, जब तक युद्ध लड़ रहे पक्षों को इसे जल्दी खत्म करने के लिए राजी नहीं किया जाता, तब तक ईरान यह दबाव छोड़ने वाला नहीं है। उन्होंने कहा, हमारी कोशिश होनी चाहिए कि यह युद्ध जल्दी खत्म हो, ताकि न केवल हमारी अर्थव्यवस्था बल्कि पूरे क्षेत्र को बचाया जा सके।
सरकार से समाधान के लिए पहल करने की अपील
कांग्रेस नेता ने कहा, इस समस्या का बहुत जल्दी समाधान होना चाहिए। थरूर ने कहा कि उन्होंने पहले ही सार्वजनिक रूप से भारत सरकार से अपील की है कि वह संघर्ष खत्म कराने, तनाव कम करने और कूटनीति के जरिये समाधान के लिए पहल करे। उन्होंने कहा, तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और गैस की भी समस्या है। असली दिक्कत यह है कि गैस की कमी हो रही है, क्योंकि कतर से गैस बाहर नहीं जा पा रही है, जबकि कतर उस क्षेत्र से भारत के आयात की जाने वाली गैस का लगभग 40 फीसदी देता है।
‘होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने पैदा हुई एलपीजी की समस्या’
उन्होंने कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य एक संकरा समुद्री मार्ग है, जिसे ईरान ने लगभग बंद कर दिया है। पिछले कई दिनों में केवल तीन या चार जहाज ही इस मार्ग से गुजर पाए हैं, जो बहुत कम है। यह जहाजों की आवाजाही के लिए एक बहुत बड़ा और अहम मार्ग है। इसके कारण एलपीजी की समस्या पैदा हो गई है।
‘रसोईघर और रेस्तरां उद्योग पर पड़ रहा असर’
उन्होंने कहा कि यह स्थिति अब आम लोगों के लिए संकट बनती जा रही है। थरूर ने कहा कि सरकार का यह कहना सही हो सकता है कि पेट्रोल, डीजल और केरोसिन जैसी चीजों की कोई खास कमी नहीं है। लेकिन अगर मंत्री कहते हैं कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है, तो उनका जवाब है कि आम लोगों से पूछा जाना चाहिए कि उन्हें क्या अनुभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि अब यह कहना सही नहीं होगा कि कोई एलपीजी संकट नहीं है। एलपीजी का संकट है और इसका असर देश के रसोईघर और रेस्तरां उद्योग दोनों पर पड़ रहा है।
‘रचनात्मक और नेतृत्व की भूमिका निभाए भारत’
उन्होंने कहा कि यह एक असली समस्या है, जिसका देश सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि पांच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं और सभी लोग प्रचार में लगे हुए हैं। ऐसे में अगर सड़क किनारे ढाबे ही नहीं होंगे तो लोग रास्ते में खाना कहां खाएंगे। उन्होंने कहा कि यह बहुत गंभीर मुद्दा है। उन्होंने यह भी कहा कि वह सरकार को दोष नहीं दे रहे हैं, लेकिन इस समस्या को स्वीकार करना चाहिए और इसका समाधान ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए। साथ ही गैस की आपूर्ति अन्य स्रोतों से बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए और क्षेत्र में शांति के लिए भी भारत को रचनात्मक और नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए।