‘जितनी आबादी-उतना हक’ पर सिंघवी ने जताई असहमति, बोले- पहले इसके परिणामों को समझने की जरूरत

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नई दिल्ली, एजेंसी। राष्ट्रीय स्तर पर जातिगत जनगणना की कांग्रेस द्वारा पुरजोर वकालत किए जाने के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस पर असहमति जताई है। उन्होंने आगाह कहा कि आखिरकार इसका परिणाम बहुसंख्यकवाद होगा। दरअसल, बिहार सरकार ने सोमवार को जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी किए। इसके बाद राहुल गांधी समेत पार्टी के कई शीर्ष नेताओं ने यह कहते हुए इसका समर्थन किया कि जिसकी जितनी आबादी है उसे उतनी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। सिंघवी की टिप्पणी इसी के मद्देनजर आई है।
सिंघवी ने एक्स पर कहा, अवसर की समानता कभी भी परिणामों की समानता के समान नहीं होती है। ‘जितनी आबादी-उतना हक’ का समर्थन करने वाले लोगों को पहले इसके परिणामों को पूरी तरह से समझना होगा। यह अंतत: बहुसंख्यकवाद में समाप्त हो जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जगदलपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या आबादी के अनुपात में अधिकार दिए जा सकते हैं। मोदी ने यह भी पूछा कि क्या देश की सबसे पुरानी पार्टी मुसलमानों के अधिकारों को कम करना चाहती है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को कहा कि बिहार की जातिगत जनगणना ने साबित कर दिया है कि राज्य में 84 फीसदी लोग ओबीसी, एससी और एसटी हैं और उनके अधिकार उनकी आबादी के अनुसार होने चाहिए। राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि केंद्र सरकार के 90 सचिवों में से केवल तीन ओबीसी हैं, जो भारत के बजट का सिर्फ पांच फीसदी संभालते हैं। इसलिए, भारत के जातिगत आंकड़ों को जानना महत्वपूर्ण है।

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