नई दिल्ली , पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने शीर्ष अदालत में एक और याचिका दायर करते हुए चुनाव आयोग को मतदाता सूची से नाम हटाने से रोकने की मांग की है। इतना ही नहीं, ममता बनर्जी ने अदालत से यह भी अपील की है कि उन्हें इस मामले में अपना पक्ष खुद रखने की अनुमति दी जाए।
मतदाताओं के अधिकार छिनने की आशंका
मुख्यमंत्री ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से एसआईआर प्रक्रिया को लेकर तुरंत निर्देश जारी करने की गुहार लगाई है। उन्होंने आशंका जताई है कि अनिवार्य सुनवाई, दस्तावेजों को खारिज करने और माइक्रो ऑब्जर्वर के इस्तेमाल जैसी प्रक्रियाओं के जरिए बड़े पैमाने पर लोगों के वोट देने का अधिकार छीना जा सकता है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग ने आवेदन में मामूली गलतियों के आधार पर भी कई लोगों को नोटिस जारी किए हैं।
2022 की लिस्ट और दस्तावेजों पर जोर
नई याचिका में ममता बनर्जी ने यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि साल 2022 की वोटर लिस्ट से किसी भी मतदाता का नाम न हटाया जाए और किसी भी नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित न किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने आग्रह किया है कि आधार कार्ड, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, पंचायत निवास प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर, सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना डेटा और जमीन या घर आवंटन के प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों को चुनाव आयोग द्वारा वैध माना जाए और स्वीकार किया जाए।
‘मैं कोर्ट का अनुशासन जानती हूंÓ
सबसे अहम बात यह है कि ममता बनर्जी ने याचिका में अपना पक्ष खुद रखने की इजाजत मांगी है। उन्होंने तर्क दिया कि एक राज्य की मुख्यमंत्री और टीएमसी की चेयरपर्सन होने के नाते उन्हें इस केस के तथ्यों और हालातों की पूरी जानकारी है। उन्होंने कहा कि वह कोर्ट के कामकाज और अनुशासन से बखूबी वाकिफ हैं, इसलिए अगर वह खुद अपनी बात रखेंगी तो कोर्ट को मामले के निपटारे में मदद मिलेगी। बताया जा रहा है कि सुनवाई से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं सुप्रीम कोर्ट पहुंच गईं, जिससे सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।