जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : कोटद्वार क्षेत्र के अंतर्गत सनेह व भाबर की अधिकांश जनता खेती पर ही निर्भर है। लेकिन, आबादी में पहुंच रहे जंगली जानवरों ने इन काश्तकारों की चुनौतियां बढ़ा दी है। फसल बर्बाद होने से काश्तकारों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। ऐसे में कई काश्तकार खेती छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। काश्तकारों ने वन विभाग व जनप्रतिनिधियों से क्षेत्र में हाथी सुरक्षा दीवार को बेहतर बनाने की मांग की है।
समस्या के संबंध में काश्तकारों की बैठक हुई। वक्ताओं ने कहा कि सनेह क्षेत्र में अधिकांश परिवार खेती पर निर्भर हैं। लेकिन, पिछले कई वर्षों से क्षेत्र में हाथी सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त पड़ी हुई है। ऐसे में हाथियों का झुंड आबादी में पहुंचकर फसल को बर्बाद कर रहा है। फसल बर्बाद होने के कारण काश्तकारों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। काश्तकारों का खेती से मोह भंग होता जा रहा है। कहा कि काश्तकार समस्या से कई बार जनप्रतिनिधि व विभागीय अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं। लेकिन, अब तक समस्या जस की तस बनी हुई है। कहा कि वन विभाग को जल्द से जल्द क्षतिग्रस्त सुरक्षा दीवार की मरम्मत करानी चाहिए। इस मौके पर रमेश सिंह, मोहन कुमार, राजीव नेगी, मुन्ना सिंह आदि मौजूद रहे।
हाईवे पर बढ़ी हाथियों की धमक
कोटद्वार-दुगड्डा के मध्य राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी इन दिनों हाथियों की धमक बढ़ने लगी है। दरअसल, गर्मी के मौसम में हाथी जंगल से निकलकर खोह नदी में पानी पीने के लिए पहुंचते हैं। एक दिन पूर्व ही हाईवे पर हाथियों का झुंड पहुंच गया था। जिसके कारण हाईवे के दोनों ओर जाम की स्थिति बनी हुई थी।