जयन्त प्रतिनिधि।
श्रीनगर गढ़वाल : हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के शैक्षणिक क्रियाकलाप केंद्र में एमएमटीटीसी के तत्वावधान में पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परम्परा का एकीकरण विषय पर छ: दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का समापन हो गया है। इस कार्यक्रम में 95 शिक्षक और शोधार्थियों प्रतिभाग किया, जिन्हें कार्यक्रम के समापन पर प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
समापन समारोह का मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. पवन सिन्हा और कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो देवेंद्र सिंह नेगी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर पवन सिन्हा गुरूजी को स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र भेंट किया। मुख्य अतिथि प्रो. पवन सिन्हा ने अपने संबोधन में भारतीय ज्ञान परम्परा की प्रासंगिकता को समकालीन परिप्रेक्ष्य में स्पष्ट करते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता सस्टेनेबिलिटी और क्षमता निर्माण का वास्तविक आधार हमारी स्वदेशी ज्ञान परंपरा में निहित है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि स्वदेशी तकनीक जैसे क्रायोजेनिक तकनीक ने न केवल भारत को वैज्ञानिक रूप से सशक्त बनाया, बल्कि वैश्विक स्तर पर सम्मान भी दिलाया। उन्होंने कहा कि कोरोना जैसी चुनौतियों से निपटने में भी देशी अनुसंधान और तकनीकी क्षमता निर्णायक सिद्ध हुई। भारतीय ज्ञान परंपरा पुन: उपयोग पर्यावरण संतुलन और जीवन के समग्र विकास की शिक्षा देती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल सूचना नहीं, बल्कि चरित्र, विवेक और राष्ट्रीय चेतना का निर्माण होना चाहिए। अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजन विश्वविद्यालय की शैक्षणिक दृष्टि को सुदृढ़ करते हैं तथा पारंपरिक ज्ञान और समकालीन चिंतन के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि आज अकादमिक शोध के प्राचीन भारतीय परिपेक्ष्य को समझने की जरूरत है। इस अवसर पर संकायाध्यक्ष प्रो. मोहन सिंह पंवार, चौरास परिसर निदेशक प्रो. राजेंद्र सिंह नेगी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. ओपी गुसाईं, डॉ. अमरजीत परिहार, यूजीसी के पर्यवेक्षक प्रो. आरएल नारायण सिम्हा, डॉ. राहुल कुंवर आदि मौजूद थे।