तस्करों ने बंदूक तान धमकाया, असहाय भी महसूस कराया

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हल्द्वानी(। उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में लकड़ी तस्करों का आतंक बढ़ता जा रहा है। शनिवार तड़के बरहनी रेंज से तीन मोटर साइकिलों पर खैर के गिल्टे ले जा रहे तस्करों के वन कर्मचारियों पर हमले की घटना ने पूरे वन विभाग में हड़कंप मचा दिया है। मोर्चे पर मौजूद वन कर्मियों का कहना है कि तस्करों ने न केवल बंदूक तानकर धमकाया, बल्कि उन्हें असहाय भी महसूस कराया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इस घटना के बाद सवाल उठने लगे हैं कि बेखौफ तस्करों से वन कर्मी कैसे मुकाबला कर पाएंगे। उनके पास ना तो पर्याप्त मात्रा में शस्त्र उपलब्ध हैं और ना ही कोई प्रशिक्षण की व्यवस्था। हल्द्वानी स्थित फॉरेस्ट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एफटीआई) में रेंजर, फॉरेस्टर और फॉरेस्ट गार्ड को प्रशिक्षण जरूर दिया जाता है, लेकिन यहां भी शूटिंग रेंज और हथियारों का अभ्यास करने की कोई सुविधा नहीं है। बंदूक चलाने, आत्मरक्षा और आपात स्थिति में कार्रवाई का कोई व्यावहारिक प्रशिक्षण नहीं होने से कर्मचारी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वन कर्मचारियों का कहना है कि तस्करों के हौसले बुलंद हैं। पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं। इनमें पुलिस से भी कोई खास मदद नहीं मिलती है। हमारे पास ना तो हथियार हैं और ना ही हथियारों को लेकर कोई स्पष्ट नीति। पत्र लिखे पर कोई कार्रवाई नहीं पूर्व में एफटीआई की डायरेक्टर डॉ. तेजस्विनी पाटिल ने प्रशिक्षणरत अधिकारियों और कर्मचारियों को शूटिंग प्रशिक्षण के लिए सेना और पुलिस दोनों विभागों को पत्र लिखा था। दोनों जगहों से शूटिंग रेंज उपलब्ध कराने की सहमति तो मिली, लेकिन हथियार उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद डॉ. पाटिल ने वन विभाग की अपनी अलग शूटिंग रेंज स्थापित करने के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा, पर अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। फॉरेस्ट गार्ड के पास 600 हेक्टेयर का जिम्मा वन विभाग की रीढ़ माने जाने वाले वन आरक्षी यानी फॉरेस्ट गार्ड को बीट अधिकारी के नाम से भी जाना जाता है। एक फॉरेस्ट गार्ड की जिम्मेदारी करीब 600 हेक्टेयर के जंगल क्षेत्र और उसमें बसे वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की होती है। चारों ओर से खुले जंगल की निगरानी बिना किसी हथियार के करनी पड़ती है। रेंज में 6-7 हथियार बीटें 15 से 30 तक उत्तराखंड के वन प्रभागों में अमूमन पांच से 15 रेंज होती हैं। हर रेंज में 15 से 30 तक बीटें होती हैं। एक बीट करीब 600 हेक्टेयर जंगल क्षेत्र को कवर करती है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, एक रेंज में केवल 6-7 बंदूकें उपलब्ध हैं। ये भी पुरानी 315 बोर, 12 बोर और कॉम्पेक्शन प्रकार की हैं। इन्हें ज्यादातर वन्यजीवों के हमले की स्थिति में गश्त के दौरान ही साथ रखा जाता है। इतनी सीमित संख्या में हथियारों से इतने बड़े क्षेत्र की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है। इससे वनकर्मियों की सुरक्षा और जंगलों की रक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कोट:: तराई का वन क्षेत्र तस्करों के लिहाज से काफी संवेदनशील है। तस्करों से निपटने को ठोस इंतजाम किए जाने की जरूरत है। वन कर्मियों को प्रशिक्षण और एम्युनिशन(गोला-बारूद) देने होंगे। इसे लेकर मुख्यालय को पत्र लिखा गया है जिस पर कार्रवाई भी चल रही है। डॉ. तेजस्विनी पाटिल, मुख्य वन संरक्षक, कुमाऊं

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