रुद्रपुर। फाल्गुन महीने की शुरुआत के साथ ही बसंत ऋतु अपने चरम पर पहुंच गई है। मौसम में सुहावने बदलाव देखे जा सकते हैं। हल्की ठंडी हवा के झोंके, खिले हुए फूल और वृक्षों पर नई कोपलों की आमद। हालांकि, इसी के साथ पतझड़ का दृश्य भी मनमोहक बन पड़ा है। वृक्षों से झड़ते पुराने पत्ते नई हरियाली का संकेत दे रहे हैं। पतझड़ के चलते सड़कों और बागों में पत्तों की रंग-बिरंगी चादर बिछ गई है, जो बसंत के सौंदर्य को और भी आकर्षक बना रही है। हवा के झोंकों के साथ उड़ते सूखे पत्ते मानो धरती को प्रकृति के इस परिवर्तन का संदेश सुना रहे हों। विशेषज्ञों के अनुसार यह ऋतु पर्यावरण के संतुलन का प्रतीक है। पुराने पत्ते झड़कर वृक्षों को नया जीवन देते हैं, जिससे प्रकृति एक नए चक्र में प्रवेश करती है। यह बदलाव केवल प्राकृतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि फाल्गुन का महीना होली और बसंतोत्सव जैसे त्योहारों की आहट भी लेकर आता है। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ेंगे, यह पतझड़ समाप्त होगा और हरियाली फिर से लौटेगी। प्रकृति का यह चक्र हर वर्ष हमें नवजीवन और सकारात्मकता का संदेश देता है।