ठंड का दंश झेल रहे आपदा पीड़ित, सिस्टम नहीं दे रहा ध्यान

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छह माह से सड़क किनारे टेंट लगाकर रह रहे आपदा प्रभावित
टेंट में रह रहे बच्चे व बुजुर्गों को ठंड में बीमारी का खतरा
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : पुनर्वास के इंतजार में काशीरामपुर तल्ला में आपदा पीड़ित सड़क किनारे टेंट लगाकर दिन काट रहे हैं। हालत यह है कि अब लगातार बढ़ रही ठंड ने इन आपदा पीड़ितों की चुनौती बढ़ा दी है। कोहरे व शीतलहर के बीच आपदा पीड़ितों का टेंट के भीतर रहना भी दूभर हो गया है। शिकायत के बाद भी सरकारी सिस्टम आपदा पीड़ितों की सुध नहीं ले रहा। ऐसे में सबसे अधिक परेशानी बच्चों व बुर्जुगों को हो रही है।
13 व 14 अगस्त को हुई अतिवृष्टि से खोह नदी उफान पर बनी हुई थी। जिससे गाड़ीघाट, काशीरामपुर तल्ला क्षेत्र में करीब 33 भवन नदी की भेंट चढ़ गए थे। प्रशासन ने आपदा प्रभावितों को आसपास के स्कूल भवन व धर्मशालाओं में शिफ्ट कर दिया था। लेकिन, एक सप्ताह बाद ही आपदा प्रभावितों को स्कूल व धर्मशाला खाली करने का फरमान सुनाया गया। जिसके बाद कुछ परिवार तो किराए के कमरों में चले गए थे। लेकिन, कई परिवार अब भी काशीरामपुर तल्ला में सड़क किनारे टेंट लगाकर रह रहे हैं। हल्के टेंट में रह रहे इन परिवारों को ठंड का दंश झेलना पड़ रहा है। ऐसे में यह ठंड कब परिवार के जनों के जीवन पर भारी पड़ जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता।

बीमारी का बढ़ रहा खतरा
सड़क किनारे टेंट लगाकर रह रहे आपदा पीड़ितों को ठंड में बीमार होने का खतरा बना हुआ है। कई लोग ऐसे भी हैं जिनके पास पर्याप्त रजाई व गद्दे भी नहीं है। ठंड के कारण सबसे अधिक खतरा बच्चों व बुजुर्गों को बना हुआ है। आपदा पीड़ित कई बार प्रशासन से उनके पुर्नवास की भी मांग उठा चुके हैं।

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