गौरैया की घटती आबादी के लिए मानव विकास सबसे अधिक जिम्मेदार
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : सात दिवसीय विशेष शिविर के दूसरे दिन शनिवार को स्वयं सेवियों ने योग के विभिन्न आसनों का अभ्यास किया। स्वयं सेवकों को योग को प्रतिदिन अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम समन्वयक हिमांशु द्विवेदी ने स्वयं सेवकों को कहा कि प्रात: काल जल्दी उठकर व्यायाम करने से मस्तिष्क तीव्र और शरीर स्वस्थ रहता है। कहा कि योग से ही मनुष्य शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हो सकता है। योग अनेकों बीमारियों को जड़ से मिटा सकता हैं।
इस मौके पर मुख्य अतिथि गौरया-गिद्ध संरक्षक शिक्षक दिनेश चन्द्र कुकरेती ने स्वयं सेवियों से कहा कि हमें प्रकृति से संतुलन बनाना चाहिए। हम प्रकृति और पशु-पक्षियों के साथ मिलकर एक सुंदर प्राकृतिक वातावरण तैयार कर सकते हैं। जिन पशु-पक्षियों को हम अनुपयोगी समझते हैं वह हमारे लिए प्राकृतिक पर्यावरण को संरक्षित करने में अच्छी खासी भूमिका निभाते हैं, लेकिन हमें इसका अंदाजा नहीं होता। उन्होंने कहा कि गौरैया हमारी प्राकृतिक मित्र है और पर्यावरण में सहायक है। कहा कि दुनिया भर में 20 मार्च गौरैया संरक्षण दिवस के रूप में मनाया जाता है। जंगल में आजकल पंच सितारा संस्कृति विस्तार ले रही है। प्रकृति के सुंदर स्थान को भी इंसान ने कमाने का जरिया बना लिया है। जो पशु-पक्षियों के लिए खतरा बन गया है। गौरैया का संरक्षण हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इंसान की भोगवादी संस्कृति ने हमें प्रकृति और उसके साहचर्य से दूर कर दिया है। गौरैया एक घरेलू और पालतू पक्षी है। यह इंसान और उसकी बस्ती के पास अधिक रहना पसंद करती है। पूर्वी एशिया में यह बहुतायत पाई जाती है। यह अधिक वजनी नहीं होती। इसका जीवनकाल दो साल का होता है। यह पांच से छह अंडे देती है। भारत की आंध्र यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में गौरैया की आबादी में 60 फीसदी से अधिक की कमी बताई गई है। दुनिया भर में ग्रामीण और शहरी इलाकों में गौरैया की आबादी घटी है। गौरैया की घटती आबादी के पीछे मानव विकास सबसे अधिक जिम्मेदार है। इस मौके पर प्रधानाचार्य दिनेश सिंह नेगी सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।
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