कविताओं के माध्यम से सिस्टम पर कसा तंज

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : साहित्यिक संस्था साहित्यांचल की ओर से आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से सिस्टम पर तंज कसा।
काव्य गोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि मेयर शैलेंद्र सिंह रावत, प्रकाश कोठारी व शिव प्रकाश कुकरेती ने संयुक्त रूप से किया। मीना डबराल ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुत दी। गायक यतेंद्र गौड़ ने अपनी गढ़वाली कविता आंखा खोलि की, अंठ धौरी की सुण ले रै मनिखी से वाहवाही लूटी। राकेश मोहन ने अपनी व्यंग्य कविता हम चिल्लाए आजाद हो गया, पहले कौन आसन पर था और अब किसने कब्जाया, हरि सिंह भंडारी ने भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारिका में राजधानी बनाया, व्यंग कवि बलवीर सिंह रावत ने उत्तराखंड आज तरुण नौजंवा है, पर इसका जोश जवानी कहां है सुनाकर स्रोताओं को गुदगुदाया। ललन प्रसाद बुड़ाकोटी ने बाबा नागार्जुन पर हे समग्र क्रांति के संस्कृति पुरुष, हे पायावर कवि, मिथिलावासी नागार्जुन सुनाकर जयहरीखाल में बिताए उनके दिनों की याद दिला दी। डॉ. बीना वशिष्ठ ने बालाकोट घटना के बाद वीर सैनिकों के बलिदान पर कहिं हाथ गिरा, कहिं देह गिरी से वातावरण को गमगीन कर दिया। कौशल्या जखमोला ने वंदे मातरम का गायन किया।

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