जयन्त प्रतिनिधि।
पौड़ी : प्रदेश के राज्य सहायता प्राप्त विद्यालयों के सबसे बड़े संगठन उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ की कार्यकारिणी की ऑनलाइन बैठक शनिवार को हुई। बैठक में माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा शैक्षिक सत्र 2025-26 के लिए घोषित वार्षिक गृह परीक्षा कार्यक्रम पर गहरी आपत्ति व्यक्त करते हुए इसमें तत्काल संशोधन की मांग उठाई है। संघ पदाधिकारियों ने चेताया कि यदि गृह परीक्षाएं बोर्ड परीक्षा से पूर्व उचित समय सीमा में पूर्ण नहीं की जातीं, तो बोर्ड परीक्षा के बाद शिक्षकों के पास आंतरिक मूल्यांकन और उत्तर पुस्तिकाओं के समुचित मूल्यांकन का पर्याप्त समय नहीं रहेगा। इससे छात्रों का परीक्षा परिणाम प्रभावित होगा, जिसकी जिम्मेदारी विभाग की होगी।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान परीक्षा कार्यक्रम उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों, पर्वतीय जनपदों की वास्तविक स्थिति, छात्र-छात्राओं की सुरक्षा व विद्यालयों की सीमित संसाधन क्षमता को पूरी तरह नजरअंदाज करता है। प्रांतीय अध्यक्ष मेजर स्वतंत्र मिश्रा ने कहा कि राज्य के अधिकांश पर्वतीय जिलों में विद्यालय दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित हैं जहां छात्रों को कई किलोमीटर पैदल चलकर विद्यालय पहुंचना पड़ता है। वर्तमान में गुलदार, भालू एवं अन्य जंगली जानवरों की बढ़ती घटनाओं से स्थिति और भी भयावह हो गई है। ऐसे में गृह परीक्षाओं को दो पालियों में आयोजित करना छात्र-छात्राओं की जान-माल की सुरक्षा से सीधा खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षा के दौरान छात्रों को अवकाश मिलता है लेकिन गृह परीक्षा में नियमित आवागमन के कारण जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। प्रांतीय मंत्री डॉ. महावीर सिंह बिष्ट ने कहा कि विभाग द्वारा जारी परीक्षा कार्यक्रम शैक्षिक दृष्टि से अव्यावहारिक है। कक्षा 9वीं में कई विद्यालयों में गणित और गृह विज्ञान जैसे विषयों की संरचना ऐसी है कि दोनों विषयों की परीक्षा अलग-अलग पालियों में कराना न तो शिक्षकों के लिए संभव है और न ही छात्रों के लिए उपयोगी। मंडलीय अध्यक्ष संजय रावत ने कहा कि उत्तराखंड एक विशिष्ट पर्वतीय राज्य है, जहां मैदानी राज्यों की तर्ज पर योजनाएं लागू नहीं की जा सकतीं। बैठक में सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में गृह परीक्षा के वर्तमान कार्यक्रम का विरोध करते हुए इसे तत्काल संशोधित करने की मांग की। बैठक में जिलाध्यक्ष भारत बिष्ट, जिला मंत्री संदीप रावत, बागेश्वर के जिलाध्यक्ष गिरीश कोरंगा, जिला मंत्री प्रकाश टाकुली, देहरादून जिलाध्यक्ष महावीर मेहता, प्रांतीय प्रवक्ता कैलाश थपलियाल, प्रांतीय मंत्री संदीप मैंदोला आदि मौजूद रहे।