बूढ़ी काकी का मंचन देख भावुक हुए दर्शक

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : तन्वी संस्था की ओर से मुंशी प्रेमचंद्र की प्रसिद्ध कहानी बूढ़ी काकी का नाट्य मंचन किय गया। जिसके माध्यम से समाज को बेहतर राह पर चलने का संदेश दिया गया। नाटक का मंचन इस कदर दमदार था कि कई दर्शकों की आंखे गीली हो गई।
कोटद्वार नगर निगम के प्रेक्षागृह में नाटक मंचन का शुभारंभ नगर आयुक्त पीएल शाह ने भगवान नटराज की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य बेहद समृद्ध है। हिंदी साहित्य में जहां समाज में व्याप्त कुरीतियों पर प्रहार किया गया है, वहीं समाज की तमाम अच्छाईयों को भी पाठकों को सामने लाया गया है। कहा कि युवा पीढ़ी को हिंदी साहित्य से जोड़ने के लिए नाटक सशक्त माध्यम हैं। नाटक में दिखाया गया कि बूढ़ी काकी अपनी पूरी वसीयत अपने भतीजे सुखराम के नाम कर देती है। वसीयत अपने नाम होने के बाद सुखराम व उसकी पत्नी रूपा काकी को भोजन के एक-एक दाने के लिए मोहताज बना देते हैं। सुखराम के बेटे के विवाह के दौरान जब रूपा बूढ़ी काकी को झूठे पत्तल चाटते देखती है तो उसे अपनी भूल का अहसास होता है और वह बूढ़ी काकी से क्षमा याचना कर उन्हें अपने हाथ से भोजन करवाती है। लेकिन, जैसे ही वह बूढ़ी काकी के मुंह में भोजन का पहला निवाला डालती है, काकी दम तोड़ देती है। बूढ़ी काकी की भूमि में संस्था की संस्थापक मीनाक्षी शर्मा का अभिनय इस कदर सशक्त रहा कि कई दर्शकों की आंखे नम को गई। इस मौके पर बड़ी तादाद में जन मौजूद रहा।

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