शहर में लगातार बढ़ती जा रही रेहड़ी-ठेली की संख्या
जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : नगर में रेहड़ी-फड़ों पर फल-सब्जी बेचने वाले व्यापारियों से वसूली जाने वाली नगर निगम की तहबाजारी आमजन की मुसीबतें बढ़ा रहा है। नगर निगम में भले ही डेढ़ सौ रेहड़ी-ठेली पंजीकृत हों। लेकिन, नगर निगम प्रतिदिन क्षेत्र में एक हजार से अधिक रेहड़ी-फड़ वालों से तीस रूपए प्रतिदिन के हिसाब से तहबाजारी वसूल रहा है। इससे भले ही निगम के राजस्व में बढ़ोत्तरी हो रही हो। लेकिन, आमजन के लिए सड़कों पर लगने वाली फल-सब्जी की रेहड़ी-फड़ परेशानी का सबब बनी हुई है।
शहर में शायद ही कोई ऐसी सड़क हो, जहां आपको फल-सब्जी की रेहड़ी-फड़ न दिखाई दे। पूरे दिन सड़कों पर घूम रहे यह रेहड़ी-ठेली वाले यातायात के साथ ही अन्य व्यवस्थाओं में बाधा बन रहे हैं। सबसे बुरी स्थिति बदरीनाथ मार्ग, गोखले मार्ग, पटेल मार्ग, स्टेशन रोड व देवी रोड पर बनी हुई है। सड़क पर सफेद पट्टी के बाहर खड़ी इन रेहड़ी-ठेलियों के कारण आमजन का पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। नियमानुसार, शहर में घूमने वाली सभी रेहड़ी-ठेलियों का नगर निगम में पंजीकृत होना आवश्यक है। जिसके बाद नगर निगम उन्हें एक स्थाई जगह उपलब्ध करवाता है। लेकिन, कोटद्वार शहर में नगर निगम रेहड़ी-ठेली वालों को केवल आर्थिकी का जरिया बना रहा है। जबकि, आज तक धरातल पर उनके लिए कई स्थाई जगह चिह्रित नहीं की गई। निगम की इसी लापरवाही के कारण शहर में लगातार रेहड़ी-ठेली वालों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। ऐसे में यदि इस ओर सख्ती से ध्यान नहीं दिया गया तो चुनौतियां और अधिक बढ़ सकती है।
कानून व्यवस्था के लिए भी खतरा
उत्तर प्रदेश के विभिन्न गांव से प्रतिदिन सैकड़ों रेहड़ी-ठेली वाले शहर में पहुंचते हैं। शहर में सब्जी व फल बेच रहे इन लोगों के बारे में नगर निगम व पुलिस के पास कोई जानकारी नहीं होती। ऐसे में यदि यह कोई आपराधिक घटना को अंजाम देते हैं तो पुलिस के हाथ खाली ही रहेंगे। जबकि, पूर्व में कई बार गोखले मार्ग में महिलाओं के साथ टप्पेबाजी की घटनाएं भी हो चुकी हैं। जिसके बाद शहरवासियों ने पुलिस व निगम से रेहड़ी-ठेली व फड वालों का सत्यापन करने की मांग उठाई। लेकिन, सरकारी सिस्टम ने इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। कई रेहड़ी-ठेली वाले नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न वार्ड की गलियों में भी घूमते रहते हैं।