लगातार बढ़ता पाखंड व अंधविश्वास चिंता का विषय

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जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में नव वर्ष के उपलक्ष्य में आर्य समाज के स्थापना दिवस पर आर्य समाज की चुनौतियों को लेकर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि इतनी शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद लगातार बढ़ता पाखंड व अंधविश्वास चिंता का विषय है।
शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आर्य समाज की स्थापना महर्षि दयानंद सरस्वती ने 7 अप्रैल 1875 को नवसंवत के दिन मुम्बई में की थी। वैदिक विद्वान आचार्य विद्या प्रसाद मिश्र ने कहा कि इतनी किताबी शिक्षा के बाद भी समाज में बढ़ता पाखंड व अंधविश्वास चिंता का विषय है। लोग सत्य व तर्क की कसौटी पर निरीक्षण नहीं करते। समाज में इन सबके प्रति जागृति लाना हर आर्य समाजी का कर्तव्य है। सत्य कोई युग काल हो वह सत्य ही रहता है। बिल्ली रास्ता काट गई व विवाह के रास्ते में यदि नदी पड़ रही है तो यह कहना सेहरा नदी पार करने के बाद बंधेगा ऐसी अनेको बातों को दैनिक जीवन में हम देखते है जो संशय व भय पैदा करती है और लोग शिकार होते हैं। इन बातों से हमें बचना चाहिए।
मुख्य अतिथि भाजपा नेता डॉ. विकास अग्रवाल ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती महान चिंतक थे, उन्होंने तर्क की तलवार दी कि पहले सोचो फिर करो। उन्होंने कहा कि आर्य समाज समाज सुधार आंदोलन है, साथ ही यह राष्ट्र वाद की प्रेरणा देता है। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि आर्य समाज का देश के स्वतंत्रता संग्राम में सर्वाधिक योगदान रहा और आर्य समाजियों के आंदोलन के कारण हैदराबाद के निजाम ने घुटने टेक दिए। आज हिन्दू समाज के सामने अनेक चुनोतियां हैं। आर्य समाज हिन्दू समाज को संगठित कर उनका निराकरण करेगा और युवा पीढ़ी में राष्ट्रवाद की अलख जगायेंगे। कार्यक्रम अध्यक्ष सोहन लाल आर्य ने आजादी की लड़ाई में आर्य समाज के योगदान पर चर्चा की। इस मौके पर राष्ट्रीय मंत्री प्रवीन आर्य, हापुड़ से आनन्द प्रकाश आर्य, गायक रविन्द्र गुप्ता, पिंकी आर्य, बिंदु मदान, आशा आर्य, रचना वर्मा, ईश्वर देवी, जनक अरोड़ा, प्रतिभा कटारिया, रजनी चुघ, सुशांता अरोड़ा, विमल चड्डा, सुमित्रा गुप्ता आदि ने मधुर भजन प्रस्तुत किए।

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