चमोली()। बिरही के जंगल दो दिन से आग से धधक रहे हैं। यहांं टिटरी तोक में लगी आग अब दूरस्थ क्षेत्रों में पहुंच गई है। आग इतनी विकराल है कि काबू पाना मुश्किल हो रहा है। कई हेक्टेयर वन संपदा जल चुकी है। वहीं सोनला के समीप कोट कंडारा के चीड़ के जंगलों में आग लगी है। इधर पीपलकोटी के सांगलचाड़ा तोक के जंगलों में लगी आग दो दिन बाद वन विभाग की टीम ने बुझा ली है। जंगलों में आग लगी होने से वातावरण में गहरी धुंध छा गई है। बिरही के टिटरी तोक में चीड़ के पेड़ और सूखी घास है। बुधवार सुबह करीब नौ बजे असामाजिक तत्वों ने बिरही के जंगल में आग लगा दी। देखते ही देखते आग विकराल हो गई। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना बदरीनाथ वन प्रभाग के अधिकारियाें को दी। फायर वाचर और अन्य वन कर्मी मौके पर आग बुझाने पहुंचे मगर आग की लपटें तेज होने से वे आग काबू नहीं कर पाए। गाड़ी गांव के प्रकाश सिंह, विकास और अव्वल सिंह का कहना है कि बिरही-निजमुला सड़क के ऊपरी हिस्से में आग लगने से कई हेक्टेयर भू-भाग पर वन संपदा जल गई है। इधर बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ सर्वेश दुबे का कहना है कि जंगलों में आग लगने की सूचना मिलने पर वन कर्मियों की टीम मौके पर भेजी गई है। पीपलकोटी के सांगलचाड़ा तोक में आग को बुझा लिया गयाा है। जल्द ही अन्य जगहों पर जंगलों की आग को काबू कर लिया जाएगा।
कई हेक्टेयर जंगल जले, हाईवे पर गिर रहे पेड़: कर्णप्रयाग। कर्णप्रयाग नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत जीजीआईसी के ऊपर जंगलों में लगी आग ने पूरी वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि यहां देर रात तक वन विभाग ने आग पर काबू पा लिया। वहीं आग के कारण स्टेट हाईवे थराली देवाल मार्ग पर पेड़ और पत्थर गिरे। थराली के बदरीनाथ वन प्रभाग के अंतर्गत मध्य पिंडर रेंज में चेपड़ों और सौगांव के जंगल में लगी आग पर 12 घंटे बाद वन विभाग ने काबू पा लिया। आग चेपड़ों, खाड़ीबगड़, सौगांव जूनिधार और गोठिंडा के जंगलों तक फैल गई थी जिससे चेपड़ों गांव की गोशालाओं को खतरा बन गया था। वहीं आग की लपटें जूनिधार गांव तक पहुंच गई थीं। इस आग का असर लगभग 20 हेक्टेयर वन भूमि पर हुआ। बृहस्पतिवार तड़के सुबह तीन बजे आग पर काबू पाया गया। खड़ी चट्टान और घने चीड़ के लीसे वाले जंगलों में आग लगने से जलते हुए पेड़ और पत्थर स्टेट हाईवे थराली देवाल मार्ग पर भी गिर रहे थे जिससे इस मार्ग से गुजरने वाले वाहनों और राहगीर जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ी। मध्य पिंडर रेंज के वन क्षेत्राअधिकारी मनोज देवराड़ी का कहना है कि आग पूरी तरह बुझा दी गई है। वहीं नारायणबगड़ में वनाग्नि से जाख, कड़ाकोट, नारायणबगड़, कठालीगाड़, टेंटुड़ा, मानूर, बेड़गांव, कौब, भगोती, केवर आदि गांवों के जंगल में आग से सैकड़ों हेक्टेयर वनसंपदा नष्ट होने से वन्यजीवों का जीवन संकट में आ गया है। पश्चिमी पिंडर रेंज के वनक्षेत्राधिकारी अखिलेश भट्ट ने बताया कि खड़ी चट्टानें और पहाड़ी होने के कारण वनकर्मियों को आग बुझाने में परेशानियों का सामना करना पड़ा था। मगर अब आग पर नियंत्रण पा लिया गया है। वनकर्मी क्षेत्र में लगातार शरारती तत्वों की निगरानी कर रहे हैं।