पिथौरागढ़)। कुमाऊं रेजिमेंट के जवान विकास कुमार का पार्थिव शरीर करीब 65 घंटे बाद शुक्रवार को पैतृक गांव गणकोट पहुंचा। रामेश्वर घाट में सैन्य सम्मान के साथ अंत्येष्टि की गई। सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से विकास के नाम के नारे लगाते हुए उसे अंतिम विदाई दी। जिला मुख्यालय से करीब पांच किमी दूर गणकोट में सुबह दस बजे के करीब लांस नायक विकास का पार्थिव शरीर पहुंचा। यहां पहले से बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। परिजन अपने लाल के पार्थिव शरीर को देखकर बिलख पड़े। पत्नी प्रीति पति के पार्थिव शरीर को लकड़ी के बक्से (कॉफिन) में देखते ही वह उससे लिपट गईं और फूट-फूटकर रोने लगीं। बाद में रामेश्वर घाट के लिए अंतिम यात्रा शुरू हुई। घर से निकली शव यात्रा में सैकड़ों की भीड़ उमड़ पड़ी। पूरा इलाका जब तक सूरज चांद रहेगा, विकास तेरा नाम रहेगा की गूंज से गुंजायमान हो उठा। घाट में सेना के जवानों ने पार्थिव शरीर को शस्त्र सलामी दी। पिता गणेश राम ने चिता को मुखाग्नि दी। बता दें कि बीते 29 मार्च को विकास अपने दो साथियों के साथ सीमा क्षेत्र में गश्त पर निकले थे, तभी अचानक हुए हिमस्खलन की चपेट में आने से विकास वीरगति को प्राप्त हो गए। 31 मार्च की शाम तीन बजे के करीब सेना की ओर से विकास के बलिदान की सूचना परिजनों को दी गई बीते रोज गुरुवार को विमान से उनका पार्थिव शरीर पहले दिल्ली और फिर एंबुलेंस के जरिए यहां लाया गया।
डीएम, मेयर ने दी श्रद्धांजलि: सिक्किम में सर्वोच्च बलिदान देने वाले लांस नायक विकास कुमार को डीएम आशीष कुमार भटगांई, मेयर कल्पना देवलाल समेत अन्य लोगों न भावभीनी श्रद्धांजलि दी। शुक्रवार को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि विकास का बलिदान देश की सेवा और सुरक्षा के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का प्रतीक है। कहा कि उनका यह सर्वोच्च बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा। आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति के लिए प्रेरित करता रहेगा। पूर्व सैनिक संगठन ने भी जवान को श्रद्धांजलि दी। यहां पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विरेंद्र सिंह बोहरा, एसडीएम जितेंद्र वर्मा आदि मौजूद रहे।