जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए गड्ढा मुक्त सड़क के निर्देश कोटद्वार शहर में केवल खानापूर्ति साबित हुए। हालत यह है कि जगह-जगह संपर्क मार्गों पर बने गड्ढे आमजन की कमर तोड़ रहे हैं। शहर के वार्डों में भी सड़कों की स्थिति भी बदहाल बनी हुई है। लगातार शिकायत के बाद भी सरकारी सिस्टम समस्या को लेकर लापरवाह बना हुआ है। ऐसे में कैसे शहर की स्थिति में सुधार होगा यह बड़ा सवाल है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 31 अक्टूबर तक प्रदेश की सभी सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकारी सिस्टम ने नगर के भीतर से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग के गड्ढों को तो भर दिया था। लेकिन, बाजार क्षेत्र से जुड़ने वाले संपर्क मार्गों की सुध नहीं ली। नतीजा, वर्षाकाल के बाद से सड़कों की स्थिति बदहाल पड़ी हुई है। सबसे बुरी स्थित मानपुर से बेलाडाट को जाने वाले मार्ग की बनी हुई है। यही स्थिति गाड़ीघाट से लालपानी को जोड़ने वाले मार्ग व घराट से महाविद्यालय को जोड़ने वाले मार्ग की भी बनी हुई है। उक्त मार्गों पर वाहन चालक गड्ढों के बीच सड़क को खोज रहे हैं। यही नहीं आए दिन इन गड्ढों की चपेट में आने से वाहन चालक भी चोटिल हो रहे हैं। सबसे अधिक खतरा दोपहिया वाहन चालकों को बना हुआ है। स्थानीय निवासी सुमित सिंह, राजीव नेगी ने बताया कि समस्या से कई बार जनप्रतिनिधि व अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं। बावजूद अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।
वार्डों की बिगड़ी सूरत
बाजार को जोड़ने वाले मुख्य मार्गों के साथ ही विभिन्न वार्डों में सड़कों की स्थिति बदहाल पड़ी हुई है। कुछ माह पूर्व वार्ड के विभिन्न मोहल्लों में नई पेयजल लाइन बिछाने के लिए खुदाई करवाई गई थी। इसके बाद पेयजल लाइन का कनेक्शन तो डाल दिया गया। लेकिन, सड़क मरम्मत की सुध नहीं ली गई। नतीजा, मोहल्लों में बदहाल सड़कों पर आमजन का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।