जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : होली की पूर्व संध्या पर साहित्यांचल संस्था की ओर से कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान कवियों ने कविता के माध्यम से पहाड़ के दर्द को बताया। साथ ही आमजन से होली का त्योहार शांति व सौहार्द पूर्वक मनाने की भी अपील की।
आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से पहाड़ के दर्द को बताया। संपत्ति नेगी की पहाड़ के पलायन पर आधारित गढ़वाली कविता कूणी काणी गौ गुठ्यार छोड़कि कुटदर भाबर ऐग्यूं फाल मारिकी.. आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम का शुभारंभ वेद प्रकाश माहेश्वरी, शिवप्रसाद कुकरेती व प्रकाश कोठारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। सर्वप्रथम अनुसुया डंगवाल ने भर गई रंगों से पिचकारी, चढ़ गई फागुनी खुमारी… कविता सुनाई। डा. अनुराग शर्मा ने रंगों के इस रंग पर्व में सब रंग सजाए है… सुनाकर माहौल को रंगमय बना दिया। संपत्ति नेगी ने गढ़वाली कविता कूणी काणी गौं गुठ्यार छोड़ीकि कुटदर भाबर ऐग्यूं फाल मारिकी.. सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। इसके अलावा शशि अमोली ने करें पांव जब नर्तन समझ लेना कि होली है…, डा. रोशन बलूनी ने रंगमत होईगीं गौं गुठ्यार, ऐगैनी होली हुल्यार गजल की प्रस्तुति दी। ललन बुडाकोटी ने रंगों के खेल में उमंगों की सी होती है, मुझे देखा उसने तो मेरे साथ होली है.., प्रवेश नवानी व राकेश अग्रवाल ने कविता पाठ के माध्यम से विश्व शांति के लिए रूस यूक्रेन, अमेरिका, इजराइल, ईरान युद्ध की भयावह स्थिति का चित्रण किया। विजय माहेश्वरी, डा. वेदप्रकाश माहेश्वरी, शिवप्रकाश कुकरेती, चंद्र प्रकाश नैथानी ने कविता पाठ कर समाज की बुराइयों पर तंज कसे। इस मौके पर जयवीर सिंह रावत, भुवन मोहन गुसांई, अशोक थपलियाल, शिव सिंह नेगी, मोहिनी नौटियाल, शंकर दत्त गौड, गोविंद डंडरियाल, मयंक कोठारी, डा. सुरेंद्र लाल आर्य मौजूद रहे।