भारत-रूस के बीच नई एयर डिफेंस डील की आहट, पेन्टसर-एस1एम सिस्टम खरीदने की तैयारी; थर-थर कांपेंगे चीन-पाक

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बीजिंग । भारत की सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। एक ओर पाकिस्तान, दूसरी ओर चीन और अब बांग्लादेश के साथ भी तनावपूर्ण हालात ने देश की रणनीतिक चिंताओं को और गहरा कर दिया है। ऐसे में पूर्व से पश्चिम और उत्तर तक भारत की सीमाओं को अभेद्य किले में तब्दील करना समय की मांग बन गया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस आवश्यकता को और गंभीरता से महसूस किया जा रहा है, खासकर हवाई खतरों से निपटने के मोर्चे पर।
इसी दिशा में इंडियन एयरफोर्स, थल सेना और नौसेना लगातार अपने एयर डिफेंस नेटवर्क को मजबूत करने में जुटी हैं। स्वदेशी तकनीक के साथ-साथ आयातित एयर डिफेंस सिस्टम पर भी भरोसा जताया जा रहा है। भारत पहले ही रूस से स्-400 एयर डिफेंस सिस्टम के कुछ स्क्वाड्रन खरीद चुका है, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी प्रभावशीलता साबित की। अब इससे भी अधिक ताकतवर स्-500 एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद को लेकर बातचीत शुरू होने की चर्चाएं हैं।
इन सबके बीच भारत और रूस एक और अहम रक्षा सौदे के करीब पहुंचते नजर आ रहे हैं। यह सौदा भी एयर डिफेंस से जुड़ा है, लेकिन स्-400 और स्-500 से अलग श्रेणी का है। दरअसल, दोनों देशों के बीच कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली क्कड्डठ्ठह्लह्यद्बह्म्-स्1रू को लेकर संभावित डील पर चर्चा तेज हो गई है। यह बातचीत ऐसे समय पर हो रही है, जब भारतीय सेना अपने नए ट्रैक्ड एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म ष्ट्रष्ठश्वञ्ज (कैरीयर एयर डिफेंस ट्रैक्ड) सिस्टम को आगे बढ़ा रही है। सेना ऐसे साझा प्लेटफॉर्म की तलाश में है, जिस पर अलग-अलग प्रकार के एयर डिफेंस हथियार तैनात किए जा सकें। इसी जरूरत को देखते हुए रूस का क्कड्डठ्ठह्लह्यद्बह्म् सिस्टम एक बार फिर चर्चा में आया है।
‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंगÓ की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले भी क्कड्डठ्ठह्लह्यद्बह्म् सिस्टम के लिए टेंडर जारी किया गया था, लेकिन वह किसी कारणवश आगे नहीं बढ़ सका। अब ष्ट्रष्ठश्वञ्ज को एक बहुउपयोगी और साझा ट्रैक्ड प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि भविष्य में आने वाले कई एयर डिफेंस सिस्टम इसी आधार पर तैनात किए जा सकें।

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