देहरादून। संयुक्त नागरिक संगठन की ओर से आयोजित वक्ताओं ने कहा कि उत्तरकाशी धराली गांव की भीषण त्रासदी 12 साल पहले केदारनाथ में हुई आपदा की पुनरावृत्ति के समान है। बादल का फटना और हिमनदीय तलछटी भूस्खलन भी है जिससे कीचड़, चट्टानें,हिमनदीय मलबा शामिल था जो विशाल मात्रा में धराली पहुंचा था। संयुक्त नागरिक संगठन की ओर से गुरुवार को नेमी रोड पर संगठन कार्याल में गोष्ठी आयोजित की गई। वक्ताओं ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग से हिमालय क्षेत्र में तापमान बढ़ने के फलस्वरुप ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं जो तलछट को अस्थिर करते हैं। घटना को लेकर सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों का निष्कर्ष था कि जलवायु परिवर्तन अनियोजित विकास,पारिस्थितिक असंतुलन और प्रशासनिक अक्षमताओं के कारण उत्तराखंड संकटग्रस्त राज्य के रूप में आकर ले रहा है जो भविष्य के लिए हानिकारक होगा। उत्तराखंड की नदियां,वनस्पति, पहाड़ जो मानव जीवन के संतुलन के आधार थे वो ही अब विनाश का कारण बनकर पारिस्थितिक तंत्र को भी प्रभावित कर रहे। विशेषज्ञों ने कहा कि हमें पर्वतीय स्थिति के अनुकूल हरित विकास मॉडल को अपनाना होगा और सरकार इसमें पर्यावरणविदों को साथ लेकर एक साझा समावेशी पर्यावरणोमुख दृष्टिकोण अपनाना होगा। गोष्ठी की अध्यक्षता ब्रिगेडियर केजी बहल तथा संचालन नरेश चंद्र कुलाश्री ने किया।सचिव सुशील त्यागी ने बताया कि आपदाओं को रोकने के लिए हमे पर्यावरण बचाओ,हिमालय बचाओ आंदोलन का आगाज करना होगा। गोष्ठी में शामिल सामाजिक संस्थाओं में संयुक्त नागरिक संगठन,स्पेक्स,उत्तरांचल उत्थान परिषद,स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी समिति, दून रेजिडेंट वेलफेयर फ्रंट, बलभद्र खलगां विकास समिति,पूर्व सैनिक संगठन,दून सिख वेलफेयर सोसाइटी, हिमालय पर्यावरण समिति, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच,हर्षल फाउंडेशन,सोशल जस्टिस फाऊंडेशन,धाद आदि संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे । इस दौरान महावीर सिंह बिष्ट, डा.ब्रजमोहन शर्मा,पूर्व पीसीसीएफ जयराज तथा डॉक्टर धनंजय मोहन,गिरीश चंद्र भट्ट,कर्नल विक्रम सिंह थापा, मेजर एमएस रावत, जितेंद्र आडंडोना,एसपी दुबे,एसपी चौहान, मुकेश शर्मा, दिनेश भंडारी,प्रदीप कुकरेती,अवधेश शर्मा,आशालाल,डा.रमा गोयल,खुशवीर सिंह,कुलदीप सिंह रावत, जीएस जस्सल, हरीराज सिंह,जगदीश बावला, उमेश्वर सिंह रावत,राजेंद्र सिंह रावत आदि शामिल थे।