जयन्त प्रतिनिधि।
कोटद्वार : आचार्य राकेश चंद्र लखेड़ा ने कहा कि सत्य के मार्ग पर चलना ही सच्चा धर्म है। आज मनुष्य अपने निजी स्वार्थो के लिए असत्य के मार्ग को अपना रहा है। जिससे उसका जीवन दु:खमय कटता है। सत्य बोलना, तप करना, प्राणियों के प्रति दया का भाव रखना व धर्म का पालन करना ही धर्म है।
भाबर क्षेत्र के अंतर्गत उमरावनगर में महाकालेश्वर मंदिर में शिव कथा का वाचन करते हुए आचार्य राकेश चंद्र लखेड़ा ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि सत्य बोलना, तप करना, प्राणियों के प्रति दया का भाव रखना व धर्म का पालन करना ही धर्म है। उन्होंने शिव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि एक बार शिलाद ऋषि ने पुत्र प्राप्ति के लिए महादेव की तपस्या की। उसके बाद उनका एक पुत्र नंदिकेश्वर हुआ, जो बड़ा ही बलवान व शिव भक्त हुआ, तब वरूण देव ने शिलाद ऋषि से कहा कि तुम्हारे पुत्र की आयु मात्र एक वर्ष है। तब नंदिकेश्वर ने कहा कि मैं मृत्यु को जीत लूंगा। ऐसा कहकर नंदिकेश्वर ने शिव की तपस्या की। महादेव ने नंदिकेश्वर को अपना मुख्य गण बना दिया। कहा कि नंदिकेश्वर का मतलब भी धर्म से ही है। कहा कि धर्मारूढ़ रहोगे तो ज्ञान गंगा का अवतरण होगा। इस मौके पर पार्षद सौरभ नौडियाल, जयदीप पुरोहित, विवेक जुयाल, मुकेश बिष्ट, गिरीश, विक्रम सिंह, उमेद सिंह, बीना देवी, पंकज नेगी आदि मौजूद रहे।