अल्मोड़ा। हवालबाग विकासखंड की ग्रामसभा अथरबनी इन दिनों होली के रंग में पूरी तरह सराबोर है। गांव में बैठकी और खड़ी होली की परंपरा पूरे उत्साह के साथ निभाई जा रही है, जिससे वातावरण लोकसंस्कृति और उल्लास से भर गया है। ग्रामसभा क्षेत्र में दिनभर पारंपरिक होली गीतों, नृत्य और वादन की स्वर लहरियां गूंज रही हैं। महिला होल्यारों की प्रस्तुतियों ने विशेष आकर्षण पैदा किया है। ‘शिव के मन माहीं बसे काशी’, ‘सिद्धि को दाता विघ्न विनाशक’, ‘होली खेले गिरजापति नंदन’, ‘जल कैसे भरूं जमुना गहरी’ और ‘जोगी आयो शहर में व्यापारी’ जैसे पारंपरिक गीतों पर महिलाओं ने मनमोहक प्रस्तुति दी, जिसे सुनने के लिए लोग बड़ी संख्या में जुट रहे हैं। इसके साथ ही ‘रंग बरसे’, ‘होली के दिन’, ‘होली खेलें रघुबीरा’ जैसे लोकप्रिय बॉलीवुड गीतों पर भी लोग झूमते नजर आए। गांव में दिन के समय घर-आंगनों में महिलाओं की होली का आयोजन हो रहा है, जबकि रात के समय मंदिरों में पुरुषों की बैठकी और खड़ी होली की महफिल सज रही है। ढोलक, मंजीरा और हारमोनियम की संगत में गाए जा रहे होली गीतों ने माहौल को पूरी तरह उत्सवमय बना दिया है। लोग एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दे रहे हैं। इसी के साथ बच्चे भी होली की मस्ती में डूबे हुए हैं। ग्राम प्रधान विनोद जोशी ने कहा कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सौहार्द और सांस्कृतिक विरासत को संजोने का माध्यम है। उन्होंने सभी ग्रामीणों को होली की बधाई देते हुए इस परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि कुमाऊंनी होली की यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है, जिसमें शास्त्रीय रागों पर आधारित बैठकी होली और लोक रंग में रची-बसी खड़ी होली का विशेष महत्व है। अथरबनी में इन दिनों यही परंपरा पूरे शबाब पर है, जो गांव की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए हुए है।